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Kullu News: देव परंपरा के साथ दियाली उत्सव शुरू
Fri, 19 Dec 2025 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 19 Dec 2025 11:10 PM IST
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मंदिरों में जले दीप और मशालें, भल्ले, जूब, अखरोट से हुआ दियाली पूजन
देवलुओं के बीच आज निभाई जाएगी गुण तोड़ने की परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। खराहल घाटी सहित कुल्लू के विभिन्न इलाकों में दियाली उत्सव का आगाज देव परंपरा के अनुसार हो गया है। हर साल बहु प्रतीक्षित पारंपरिक दियाली उत्सव पौष माह में कुल्लू में मनाया जाता है।
शुक्रवार को मंदिरों में दीप और मशालें जलाने के साथ गांव-गांव में पूरे उत्साह से दियाली उत्सव की धूम रही। आराध्य देवता जुआणी महादेव के भंडार के प्रांगण में और थान देवता के मंदिर तथा ग्राहण में देव परंपरा के अनुसार जागरा जलाया गया।
साथ ही संध्याकाल में दियाली का विशेष पूजन हर घर में भल्ले, जौ की जूब और अखरोट से हुआ। शनिवार को जुआणी महादेव और थान देवता के देवलुओं के बीच गूण तोड़ने की देव परंपरा का निर्वहन जुआणी महादेव के मंदिर स्थित न्योली में किया जाएगा। जुआणी महादेव के गोंठीदार राम नाथ ठाकुर ने कहा कि इस दौरान अश्लील नुक्तों का आदान-प्रदान मर्यादा में रहकर किया जाता है। माना जाता है कि आसुरी शक्तियों को भगाने के लिए ऐसा किया जाता है। कुल्लू की अनूठी देव परंपरा का प्रतीक दियाली उत्सव खराहल के थरमाण, न्योली, जगोट, जुआणी, ग्राहण , बराधा, शागंरीबाग, ज्वाणी रोपा, लोअर थरमाण, ओड़ीधार, छथौल आदि में शुक्रवार को दिवाली पूजन हुआ। ऊझी घाटी के मनाली, जगतसुख, करजां, सरसई, नग्गर आदि गांव में भी दियाली मनाई गई। घर-घर में भल्ले, गीचे और पारंपरिक पकवान भी विशेष रूप से बनाए। इसके लिए गृहणियां दोपहर से रसोई में जुटी रही और संध्याकाल में भल्ले और अखरोट व जौ की जूब से दिवाली पूजन किया। इस मौके पर जूब देकर आर्शीवाद लिया गया। जुआणी महादेव के कारदार ओम प्रकाश महंत ने कहा कि शनिवार को पूजा-अर्चना के बाद गूण बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए हर घर से पराली को एकत्रित किया जाता है। दोपहर बाद गूण तोड़ने की रस्म को देव परंपरा से निभाया जाएगा।
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देवलुओं के बीच आज निभाई जाएगी गुण तोड़ने की परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। खराहल घाटी सहित कुल्लू के विभिन्न इलाकों में दियाली उत्सव का आगाज देव परंपरा के अनुसार हो गया है। हर साल बहु प्रतीक्षित पारंपरिक दियाली उत्सव पौष माह में कुल्लू में मनाया जाता है।
शुक्रवार को मंदिरों में दीप और मशालें जलाने के साथ गांव-गांव में पूरे उत्साह से दियाली उत्सव की धूम रही। आराध्य देवता जुआणी महादेव के भंडार के प्रांगण में और थान देवता के मंदिर तथा ग्राहण में देव परंपरा के अनुसार जागरा जलाया गया।
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साथ ही संध्याकाल में दियाली का विशेष पूजन हर घर में भल्ले, जौ की जूब और अखरोट से हुआ। शनिवार को जुआणी महादेव और थान देवता के देवलुओं के बीच गूण तोड़ने की देव परंपरा का निर्वहन जुआणी महादेव के मंदिर स्थित न्योली में किया जाएगा। जुआणी महादेव के गोंठीदार राम नाथ ठाकुर ने कहा कि इस दौरान अश्लील नुक्तों का आदान-प्रदान मर्यादा में रहकर किया जाता है। माना जाता है कि आसुरी शक्तियों को भगाने के लिए ऐसा किया जाता है। कुल्लू की अनूठी देव परंपरा का प्रतीक दियाली उत्सव खराहल के थरमाण, न्योली, जगोट, जुआणी, ग्राहण , बराधा, शागंरीबाग, ज्वाणी रोपा, लोअर थरमाण, ओड़ीधार, छथौल आदि में शुक्रवार को दिवाली पूजन हुआ। ऊझी घाटी के मनाली, जगतसुख, करजां, सरसई, नग्गर आदि गांव में भी दियाली मनाई गई। घर-घर में भल्ले, गीचे और पारंपरिक पकवान भी विशेष रूप से बनाए। इसके लिए गृहणियां दोपहर से रसोई में जुटी रही और संध्याकाल में भल्ले और अखरोट व जौ की जूब से दिवाली पूजन किया। इस मौके पर जूब देकर आर्शीवाद लिया गया। जुआणी महादेव के कारदार ओम प्रकाश महंत ने कहा कि शनिवार को पूजा-अर्चना के बाद गूण बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए हर घर से पराली को एकत्रित किया जाता है। दोपहर बाद गूण तोड़ने की रस्म को देव परंपरा से निभाया जाएगा।
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