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दुर्वा घास देकर देवी-देवताओं और बुजुर्गों से लिया आशीर्वाद
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कुल्लू में सायर साजा उत्सव पर बड़ेञबुजुर्गो को दूब देकर आशीर्वाद लेते हुए। -संवाद
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। जिले में आश्विन संक्रांति के अवसर पर सायर पर्व धूमधाम से मनाया गया। सायर पर्व पर लोगों ने जूब देकर देवी-देवताओं और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। सायर पर्व पर लोगों ने घरों में सुबह विशेष पूजा-अर्चना की। वहीं अपने आराध्य देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की।
संक्रांति के दिन कुल्लू घाटी के देवालयों में आराध्यों के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। बता दें कि सायर संक्रांति से खराहल घाटी के बिजली महादेव, तांदला, ऊझी घाटी के हलाण, मणिकर्ण घाटी के पड़ेई, धारगण, भेखली के ब्यासर, सैंज के शांघड़ और लगघाटी के बागन में शौयरी मेलों का भी आगाज हो गया है। देव परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार मंदिरों में मेला मनाया गया।
सायर संक्रांति पर लोगों ने घरों में पारंपरिक व्यंजन पकाए। इन्हें जूब देने आए मेहमानों को परोसा गया। घर आए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, भल्ले, कचौरी और देसी घी के पकवान परोसे गए। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरों में भी सायर संक्रांति को हर्षोल्लास से मनाया गया। घाटी निवासी रेशम, कमलेश, सुभाष, अतुल, मोहन लाल, पवन शर्मा, अमन, रमन, शुभम और सुनील ने कहा कि सायर उत्सव जिला के प्रमुख त्योहारों में एक है।
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संक्रांति से लेकर आगामी सात दिनों तक जूूब बांटने की परंपरा है, जिसमें कनिष्ठ अपने से बड़ों को जूब देकर उनका मान-सम्मान बढ़ाते हैं और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। शनिवार सुबह से सायर उत्सव में कनिष्ठों ने घर-घर जाकर बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया। जूब देने का सिलसिला दिनभर चला रहा। घर आए मेहमानों की भी खूब खातिरदारी की गई।
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संक्रांति के दिन कुल्लू घाटी के देवालयों में आराध्यों के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। बता दें कि सायर संक्रांति से खराहल घाटी के बिजली महादेव, तांदला, ऊझी घाटी के हलाण, मणिकर्ण घाटी के पड़ेई, धारगण, भेखली के ब्यासर, सैंज के शांघड़ और लगघाटी के बागन में शौयरी मेलों का भी आगाज हो गया है। देव परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार मंदिरों में मेला मनाया गया।
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सायर संक्रांति पर लोगों ने घरों में पारंपरिक व्यंजन पकाए। इन्हें जूब देने आए मेहमानों को परोसा गया। घर आए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, भल्ले, कचौरी और देसी घी के पकवान परोसे गए। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरों में भी सायर संक्रांति को हर्षोल्लास से मनाया गया। घाटी निवासी रेशम, कमलेश, सुभाष, अतुल, मोहन लाल, पवन शर्मा, अमन, रमन, शुभम और सुनील ने कहा कि सायर उत्सव जिला के प्रमुख त्योहारों में एक है।
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संक्रांति से लेकर आगामी सात दिनों तक जूूब बांटने की परंपरा है, जिसमें कनिष्ठ अपने से बड़ों को जूब देकर उनका मान-सम्मान बढ़ाते हैं और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। शनिवार सुबह से सायर उत्सव में कनिष्ठों ने घर-घर जाकर बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया। जूब देने का सिलसिला दिनभर चला रहा। घर आए मेहमानों की भी खूब खातिरदारी की गई।