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स्थानीय सब्जी मंडियों में बिक रहा 90 फीसदी सेब
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पतलीकूहल/मनाली। ऊझी घाटी की बंदरोल और पतलीकूहल समेत अन्य स्थानीय सब्जी मंडियों में ही 90 फीसदी सेब बिक रहा है। महज 10 फीसदी सेब ही बाहर की मंडियों में जा रहा है। हालांकि पहले भी 60 फीसदी तक सेब स्थानीय मंडियों मे बिकता रहा है। लेकिन इस बार कोरोना के चलते बागवान दिल्ली की आजादपुर समेत अन्य बाहरी मंडियों में सेब भजने के बजाय स्थानीय मंडियों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
लोकल मंडियों में सेब बेचने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बोली साफ और स्पष्ट भाषा में होने के चलते रेट सबके सामने तय होते हैं। सेब की कीमत भी तत्काल मिल जाती है। उधर दिल्ली समेत बाहर की मंडियों में कोड वर्ड में बोली लगने से बागवानों को अपने उत्पाद की बिक्री की कीमत का सही पता नहीं चल पाता। लिहाजा लोकल मंडियों में सेब बेचने का प्रचलन सालों साल बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना काल में तो स्थानीय मंडियों का महत्व और भी बढ़ गया है। स्थानीय बागवान रामलाल, रमेश कमलेश, मोहन, लालाधर, साहिल, सुरेश, जितेेंद्र, रोहित, पवन, रविंद्र और चमन ने कहा कि स्थानीय मंडियों में सेब ले जाने पर पैकिंग करने का झंझट नहीं रहता। पेड़ से सेब उतारने पर सीधा क्रेट में डालकर मंडी में पहुंचाने पर अपने सामने ही रेट तय हो जाते हैं। लिहाजा लोकल मंडी में सेब ले जाना सही रहता है। इसके अलावा स्थानीय मंडियों में सेब के रेट भी ठीक मिल रहे हैं। उधर, पतलीकूहल सब्जी मंडी आढ़ती संघ के अध्यक्ष फतेह चंद चौहान ने कहा कि सही समय पर अदायगी होने तथा सब कुछ बागवान के सामने तय होने से बागवान लोकल मंडियों को तरजीह दे रहे हैं।
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लोकल मंडियों में सेब बेचने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बोली साफ और स्पष्ट भाषा में होने के चलते रेट सबके सामने तय होते हैं। सेब की कीमत भी तत्काल मिल जाती है। उधर दिल्ली समेत बाहर की मंडियों में कोड वर्ड में बोली लगने से बागवानों को अपने उत्पाद की बिक्री की कीमत का सही पता नहीं चल पाता। लिहाजा लोकल मंडियों में सेब बेचने का प्रचलन सालों साल बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना काल में तो स्थानीय मंडियों का महत्व और भी बढ़ गया है। स्थानीय बागवान रामलाल, रमेश कमलेश, मोहन, लालाधर, साहिल, सुरेश, जितेेंद्र, रोहित, पवन, रविंद्र और चमन ने कहा कि स्थानीय मंडियों में सेब ले जाने पर पैकिंग करने का झंझट नहीं रहता। पेड़ से सेब उतारने पर सीधा क्रेट में डालकर मंडी में पहुंचाने पर अपने सामने ही रेट तय हो जाते हैं। लिहाजा लोकल मंडी में सेब ले जाना सही रहता है। इसके अलावा स्थानीय मंडियों में सेब के रेट भी ठीक मिल रहे हैं। उधर, पतलीकूहल सब्जी मंडी आढ़ती संघ के अध्यक्ष फतेह चंद चौहान ने कहा कि सही समय पर अदायगी होने तथा सब कुछ बागवान के सामने तय होने से बागवान लोकल मंडियों को तरजीह दे रहे हैं।
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