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Kullu News: पहाड़ से मजबूत निकली रेशम की डोर, बंद रास्ते नहीं रोक पाए बहनों की डगर
Sat, 09 Aug 2025 10:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 09 Aug 2025 10:44 PM IST
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कुल्लू के लगघाटी में भाई को राखी बाधने के लिए जान जोखिम में डालकर जाती बहने।-संवाद
ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक रास्तों को पार कर राखी बांधने पहुंचीं बहनें
कहीं बंद सड़कों तो कहीं भूस्खलन के खतरे ने ली परीक्षा, नहीं हारी हिम्मत
राजीव नैय्यर
कुल्लू। बारिश, भूस्खलन और बंद सड़कों के बीच जब हर रास्ता मुश्किल था, तब भी बहनों ने रिश्ते की डोर को टूटने नहीं दिया। जिले में रक्षाबंधन पर महिलाओं और युवतियों ने नालों को पार किया, खड्डों से गुजरीं और जानलेवा रास्तों से होते हुए भाई की कलाई तक पहुंचीं।
कइयों को मायूस होकर लौटना पड़ा तो कइयों ने जोखिम उठाकर परंपरा निभाई। भले ही नेशनल हाईवे-305 और कई ग्रामीण मार्ग बंद रहे लेकिन भाई-बहन के इस रिश्ते की डोर इन रुकावटों से कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुई।
गौरतलब है कि भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनें कई बाधाएं पार कर पहुंचीं। विवाहित महिलाओं को मायके और महाविद्यालयों में पढ़ने वाली युवतियों को घर पहुंचने और भाई को राखी बांधने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जिले में एनएच-305 के अलावा कई ग्रामीण सड़कें बंद हैं। महिलाओं को अधिकतर सफर ऊबड़-खाबड़ और क्षतिग्रस्त रास्तों से करना पड़ा। परिवहन निगम की निशुल्क सेवा महिलाओं के लिए जारी रही लेकिन सड़कें बंद होने से इस सेवा का अधिक लाभ नहीं मिला। कुल्लू में एचआरटीसी के 60 से अधिक रूट बंद हैं।
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कुछ महिलाएं मायूस होकर लौटी वापस
मंडी और बंजार की तरफ जाने और यहां से कुल्लू आने वाली महिलाओं को मायूस होकर लौटना पड़ा। हाईवे-305 और मंडी-कुल्लू के बीच कई जगह मार्ग बंद रहे। घंटों तक जाम में फंसने के बाद महिलाओं को वापस लौटना पड़ा। रजनी, आरती और मीना ने कहा कि वे मंडी जा रही थीं लेकिन पिछले कई दिनों से हाईवे बंद होने से हिम्मत नहीं जुटा पाईं। रक्षा बंधन के दिन जाने की कोशिश की लेकिन हाईवे पर हुआ भूस्खलन बाधा बन गया। आनी और निरमंड की ओर जाने वाली महिला रागिनी, सोनाक्षी और विद्यार्थी रंजना, अंकिता, मोहिनी ने कहा कि वे हाईवे-305 के खुलने का इंतजार कई दिनों से कर रही हैं।
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कहीं बंद सड़कों तो कहीं भूस्खलन के खतरे ने ली परीक्षा, नहीं हारी हिम्मत
राजीव नैय्यर
कुल्लू। बारिश, भूस्खलन और बंद सड़कों के बीच जब हर रास्ता मुश्किल था, तब भी बहनों ने रिश्ते की डोर को टूटने नहीं दिया। जिले में रक्षाबंधन पर महिलाओं और युवतियों ने नालों को पार किया, खड्डों से गुजरीं और जानलेवा रास्तों से होते हुए भाई की कलाई तक पहुंचीं।
कइयों को मायूस होकर लौटना पड़ा तो कइयों ने जोखिम उठाकर परंपरा निभाई। भले ही नेशनल हाईवे-305 और कई ग्रामीण मार्ग बंद रहे लेकिन भाई-बहन के इस रिश्ते की डोर इन रुकावटों से कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुई।
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गौरतलब है कि भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनें कई बाधाएं पार कर पहुंचीं। विवाहित महिलाओं को मायके और महाविद्यालयों में पढ़ने वाली युवतियों को घर पहुंचने और भाई को राखी बांधने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जिले में एनएच-305 के अलावा कई ग्रामीण सड़कें बंद हैं। महिलाओं को अधिकतर सफर ऊबड़-खाबड़ और क्षतिग्रस्त रास्तों से करना पड़ा। परिवहन निगम की निशुल्क सेवा महिलाओं के लिए जारी रही लेकिन सड़कें बंद होने से इस सेवा का अधिक लाभ नहीं मिला। कुल्लू में एचआरटीसी के 60 से अधिक रूट बंद हैं।
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कुछ महिलाएं मायूस होकर लौटी वापस
मंडी और बंजार की तरफ जाने और यहां से कुल्लू आने वाली महिलाओं को मायूस होकर लौटना पड़ा। हाईवे-305 और मंडी-कुल्लू के बीच कई जगह मार्ग बंद रहे। घंटों तक जाम में फंसने के बाद महिलाओं को वापस लौटना पड़ा। रजनी, आरती और मीना ने कहा कि वे मंडी जा रही थीं लेकिन पिछले कई दिनों से हाईवे बंद होने से हिम्मत नहीं जुटा पाईं। रक्षा बंधन के दिन जाने की कोशिश की लेकिन हाईवे पर हुआ भूस्खलन बाधा बन गया। आनी और निरमंड की ओर जाने वाली महिला रागिनी, सोनाक्षी और विद्यार्थी रंजना, अंकिता, मोहिनी ने कहा कि वे हाईवे-305 के खुलने का इंतजार कई दिनों से कर रही हैं।