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Kullu News: एक प्रवक्ता पढ़ा रहा जमा-एक और दो के 94 के विद्यार्थी
Mon, 18 Nov 2024 10:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 18 Nov 2024 10:24 PM IST
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बठाहड़ स्कूल में प्रधानाचार्य समेत छह अन्य पद खाली, अभिभावकों की चिंता बढ़ी
बोले- आधे से ज्यादा बीत गया सत्र, अभी तक प्रवक्ता तैनात नहीं कर पाया विभाग
प्रीतम शर्मा
गुशैणी (कुल्लूू)। उपमंडल बंजार के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बठाहड़ में विद्यार्थी पिछले सात महीने से अध्यापक के इंतजार में हैं। स्कूल में जमा एक और दो के 94 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक ही प्रवक्ता है।
वर्ष 2024-25 का शैक्षणिक सत्र आधा से अधिक बीत चुका है, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग प्रवक्ताओं की तैनाती करना भूल गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां स्कूल प्रधानाचार्य समेत छह अन्य पद खाली हैं। स्कूल में वर्तमान में सिर्फ हिंदी के प्रवक्ता ही सेवाएं दे रहे हैं। प्रधानाचार्य, प्रवक्ता इतिहास, प्रवक्ता राजनीति शास्त्र, प्रवक्ता अंग्रेजी, डीपीई, आईटी अध्यापक के पद खाली हैं। इन्हें भरने के लिए न सरकार दिलचस्पी दिखा रही है और न ही विभाग कोई पहल कर रहा है। अभिभावक सरकार और शिक्षा विभाग से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रवक्ताओं की नियुक्ति जल्द होगी। एक प्रवक्ता पर जमा एक और जमा दो कक्षा का सारा बोझ है। बदहाल शिक्षा व्यवस्था के चलते अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उधर, शिक्षा उप निदेशक अमर सिंह चौहान ने कहा कि विभाग ने इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। आदेश आने के बाद खाली पद भरे जाएंगे।
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एसएमसी ने कई बार सरकार, शिक्षा विभाग से खाली पद भरने की मांग की, लेकिन यह पूरी नहीं हुई है। विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जल्द प्रधानाचार्य सहित प्रवक्ताओं के खाली पद भरे जाएं। - गुमत राम
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अप्रैल 2024 से बठाहड़ शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ है। नवंबर का महीना आधा से अधिक बीत गया है, लेकिन प्रवक्ताओं के पद नहीं भरे जा रहे हैं। अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूल में दाखिला करवाने का विचार बना रहे हैं। - प्रकाश ठाकुर
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सरकार सूबे के सरकारी स्कूलों में शिक्षा को बेहतर बनाने का दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ नहीं हो रहा है। दूरदराज क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति नहीं होगी तो शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा। - धर्म चंद
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बच्चों को बठाहड़ स्कूल में दाखिला दिलाने के बाद कई अभिभावक पछता रहे हैं। अगर विभाग प्रवक्ताओं के खाली पद भरता तो शायद यह नौबत नहीं आती। अभिभावकों में सरकार की व्यवस्था के प्रति नाराजगी है। - लाल चंद
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बोले- आधे से ज्यादा बीत गया सत्र, अभी तक प्रवक्ता तैनात नहीं कर पाया विभाग
प्रीतम शर्मा
गुशैणी (कुल्लूू)। उपमंडल बंजार के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बठाहड़ में विद्यार्थी पिछले सात महीने से अध्यापक के इंतजार में हैं। स्कूल में जमा एक और दो के 94 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक ही प्रवक्ता है।
वर्ष 2024-25 का शैक्षणिक सत्र आधा से अधिक बीत चुका है, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग प्रवक्ताओं की तैनाती करना भूल गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां स्कूल प्रधानाचार्य समेत छह अन्य पद खाली हैं। स्कूल में वर्तमान में सिर्फ हिंदी के प्रवक्ता ही सेवाएं दे रहे हैं। प्रधानाचार्य, प्रवक्ता इतिहास, प्रवक्ता राजनीति शास्त्र, प्रवक्ता अंग्रेजी, डीपीई, आईटी अध्यापक के पद खाली हैं। इन्हें भरने के लिए न सरकार दिलचस्पी दिखा रही है और न ही विभाग कोई पहल कर रहा है। अभिभावक सरकार और शिक्षा विभाग से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रवक्ताओं की नियुक्ति जल्द होगी। एक प्रवक्ता पर जमा एक और जमा दो कक्षा का सारा बोझ है। बदहाल शिक्षा व्यवस्था के चलते अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उधर, शिक्षा उप निदेशक अमर सिंह चौहान ने कहा कि विभाग ने इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। आदेश आने के बाद खाली पद भरे जाएंगे।
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एसएमसी ने कई बार सरकार, शिक्षा विभाग से खाली पद भरने की मांग की, लेकिन यह पूरी नहीं हुई है। विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जल्द प्रधानाचार्य सहित प्रवक्ताओं के खाली पद भरे जाएं। - गुमत राम
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अप्रैल 2024 से बठाहड़ शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ है। नवंबर का महीना आधा से अधिक बीत गया है, लेकिन प्रवक्ताओं के पद नहीं भरे जा रहे हैं। अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूल में दाखिला करवाने का विचार बना रहे हैं। - प्रकाश ठाकुर
सरकार सूबे के सरकारी स्कूलों में शिक्षा को बेहतर बनाने का दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ नहीं हो रहा है। दूरदराज क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति नहीं होगी तो शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा। - धर्म चंद
बच्चों को बठाहड़ स्कूल में दाखिला दिलाने के बाद कई अभिभावक पछता रहे हैं। अगर विभाग प्रवक्ताओं के खाली पद भरता तो शायद यह नौबत नहीं आती। अभिभावकों में सरकार की व्यवस्था के प्रति नाराजगी है। - लाल चंद