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Kullu News: पानी का रिसाव व भूस्खलन की जांच के लिए होगा जियोटेक्निकल सर्वे
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कुल्लू। सैंज घाटी में जलविद्युत परियोजनाएं बनने के बाद बढ़ी पानी के रिसाव और भूस्खलन को घटनाओं को देखते हुए क्षेत्र का जियोटेक्निकल सर्वे किया जाएगा। इसको लेकर प्रशासन और एनएचपीसी परियोजना प्रबंधन के अधिकारियों ने प्रारूप बनाया है। इस सर्वे के जरिये इस बात का पता लगाया जाएगा कि टनल में रिसाव और भूस्खलन की घटनाएं होने के क्या कारण हैं और आने वाले समय में इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। हाल ही में प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के बीच हुई बैठक में इसको लेकर गहन मंथन किया गया है। इसके लिए सर्वे से जुड़े संगठन से बात करने को लेकर भी चर्चा हुई।
जियोटेक्निकल सर्वे बताएगा कि क्षेत्र में मौजूद चट्टान की मजबूती, स्थिरता और पानी के दबाव आदि के आधार पर टनल कितनी सुरक्षित है और किस तरह की इंजीनियरिंग व्यवस्था चाहिए।
2004 से घटनाओं का दौर शुरू
सैंज क्षेत्र में परियोजना निर्माण के कारण भूस्खलन की घटनाओं का दौर शुरू हो गया था और उसके बाद टनल से रिसाव की घटनाएं भी सामने आईं। इन घटनाओं से क्षेत्र के लोगों को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है। जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस क्षेत्र में अप्रैल 2004, जून 2006, फरवरी 2007 में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं जबकि अप्रैल 2017, 2014, 2018-19, नवंबर 2023 और 2025 में टनल रिसाव की घटनाएं पेश आ चुकी हैं। इससे लोगों को खतरा बढ़ा है। इसके अलावा क्षेत्र में 2004, 2005, 2010 और 2011, 2023 और 2025 में बाढ़ की घटनाएं हो चुकी हैं। लोग इसका कारण भी काफी हद तक परियोजना निर्माण को बता रहे हैं।
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इस घटना ने डराया
19 सितंबर को एनएचपीसी की जल विद्युत परियोजना की टनल से पानी के रिसाव से हुए नुकसान ने क्षेत्र में खौफ पैदा कर दिया है। प्रभावितों का कहना है कि बार-बार घटित होने वाली इस तरह की घटनाओं से जहां परियोजना निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं तो वहीं क्षेत्र के गांव भी खतरे में पड़ गए हैं।
क्षेत्र में टनल रिसाव और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को लेकर क्षेत्र का जियोटेक्निकल सर्वे किया जाएगा। इस संदर्भ में एनएचपीसी के अधिकारी भी राजी हैं और जल्द ही किसी बड़े सर्वे संगठन से बात की जाएगी जिससे घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा सके और आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए उपाय किए जा सके।
पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी बंजार
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जियोटेक्निकल सर्वे बताएगा कि क्षेत्र में मौजूद चट्टान की मजबूती, स्थिरता और पानी के दबाव आदि के आधार पर टनल कितनी सुरक्षित है और किस तरह की इंजीनियरिंग व्यवस्था चाहिए।
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2004 से घटनाओं का दौर शुरू
सैंज क्षेत्र में परियोजना निर्माण के कारण भूस्खलन की घटनाओं का दौर शुरू हो गया था और उसके बाद टनल से रिसाव की घटनाएं भी सामने आईं। इन घटनाओं से क्षेत्र के लोगों को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है। जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस क्षेत्र में अप्रैल 2004, जून 2006, फरवरी 2007 में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं जबकि अप्रैल 2017, 2014, 2018-19, नवंबर 2023 और 2025 में टनल रिसाव की घटनाएं पेश आ चुकी हैं। इससे लोगों को खतरा बढ़ा है। इसके अलावा क्षेत्र में 2004, 2005, 2010 और 2011, 2023 और 2025 में बाढ़ की घटनाएं हो चुकी हैं। लोग इसका कारण भी काफी हद तक परियोजना निर्माण को बता रहे हैं।
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इस घटना ने डराया
19 सितंबर को एनएचपीसी की जल विद्युत परियोजना की टनल से पानी के रिसाव से हुए नुकसान ने क्षेत्र में खौफ पैदा कर दिया है। प्रभावितों का कहना है कि बार-बार घटित होने वाली इस तरह की घटनाओं से जहां परियोजना निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं तो वहीं क्षेत्र के गांव भी खतरे में पड़ गए हैं।
क्षेत्र में टनल रिसाव और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को लेकर क्षेत्र का जियोटेक्निकल सर्वे किया जाएगा। इस संदर्भ में एनएचपीसी के अधिकारी भी राजी हैं और जल्द ही किसी बड़े सर्वे संगठन से बात की जाएगी जिससे घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा सके और आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए उपाय किए जा सके।
पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी बंजार