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Kullu News: जयघोष के साथ मणिमहेश के लिए निकला भोले के भक्तों का कारवां
Sun, 24 Aug 2025 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 24 Aug 2025 10:48 PM IST
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लाहौल के त्रिलोकनाथ पोरी मेले के आखिरी दिन सैकड़ों शिव श्रद्धालू पैदल मणिमहेश झील की यात्रा पर
त्रिलोकनाथ से आशीर्वाद लेने के बाद रवाना हुए 200 श्रद्धालु, 35 महिलाएं भी शामिल
हिमाचल की लोक आस्था और परंपरा की अमिट छाप छोड़ती है घाटी की डढ़ी यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की अद्वितीय मिसाल पेश करते हुए त्रिलोकनाथ धाम से सैकड़ों श्रद्धालुओं का जत्था हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मणिमहेश यात्रा के लिए रवाना हुआ।
देव गूरों की दिव्य प्रस्तुतियों और मंदिर प्रांगण में गूंजती घंटियों के बीच माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं की यह कठिन लेकिन पावन यात्रा डढ़ी यात्रा के नाम से प्रसिद्ध है। यह हिमाचल की लोक आस्था और परंपरा की अमिट छाप छोड़ती है। घाटी के हर कोने से श्रद्धालु त्रिलोकीनाथ से आशीर्वाद लेकर मणिमहेश की यात्रा शुरू करते हैं। राज्य स्तरीय पोरी मेले के समापन के बाद रविवार सुबह भगवान त्रिलोकीनाथ से आशीर्वाद लेकर सैकड़ों श्रद्धालु मणिमहेश के लिए रवाना हुए। 200 श्रद्धालुओं के जत्थे में 35 महिलाएं भी शामिल है। हिंसा गांव के बुजुर्ग नाग चंद ने बताया कि मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालुओं की मन्नत अवश्य पूरी होती है। जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं को विधायक अनुराधा ने शुभकामनाएं दी हैं।
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90 किलोमीटर की यात्रा में ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरेंगे शिवभक्त
यह जत्था समुद्रतल से 16,800 फीट ऊंचे कुगती जोत से होकर पांच दिन बाद पवित्र डल झील पर पहुंचेगा। श्रद्धालु करीब 90 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरेंगे। मणिमहेश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के जत्थे का पहला पड़ाव रविवार को थिरोट गांव के समीप होगा। सोमवार को रापे गांव से कुछ दूर, मंगलवार को तीसरी रात्रि का पड़ाव खोलडू़ पधर से एक किलोमीटर आगे होगा। बुधवार को केलंग मंदिर और वीरवार को अलियास शुक्रवार को छठे दिन जाकर यह जत्था मणिमहेश पहुंचेगा।
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हिमाचल की लोक आस्था और परंपरा की अमिट छाप छोड़ती है घाटी की डढ़ी यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की अद्वितीय मिसाल पेश करते हुए त्रिलोकनाथ धाम से सैकड़ों श्रद्धालुओं का जत्था हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मणिमहेश यात्रा के लिए रवाना हुआ।
देव गूरों की दिव्य प्रस्तुतियों और मंदिर प्रांगण में गूंजती घंटियों के बीच माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं की यह कठिन लेकिन पावन यात्रा डढ़ी यात्रा के नाम से प्रसिद्ध है। यह हिमाचल की लोक आस्था और परंपरा की अमिट छाप छोड़ती है। घाटी के हर कोने से श्रद्धालु त्रिलोकीनाथ से आशीर्वाद लेकर मणिमहेश की यात्रा शुरू करते हैं। राज्य स्तरीय पोरी मेले के समापन के बाद रविवार सुबह भगवान त्रिलोकीनाथ से आशीर्वाद लेकर सैकड़ों श्रद्धालु मणिमहेश के लिए रवाना हुए। 200 श्रद्धालुओं के जत्थे में 35 महिलाएं भी शामिल है। हिंसा गांव के बुजुर्ग नाग चंद ने बताया कि मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालुओं की मन्नत अवश्य पूरी होती है। जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं को विधायक अनुराधा ने शुभकामनाएं दी हैं।
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90 किलोमीटर की यात्रा में ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरेंगे शिवभक्त
यह जत्था समुद्रतल से 16,800 फीट ऊंचे कुगती जोत से होकर पांच दिन बाद पवित्र डल झील पर पहुंचेगा। श्रद्धालु करीब 90 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरेंगे। मणिमहेश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के जत्थे का पहला पड़ाव रविवार को थिरोट गांव के समीप होगा। सोमवार को रापे गांव से कुछ दूर, मंगलवार को तीसरी रात्रि का पड़ाव खोलडू़ पधर से एक किलोमीटर आगे होगा। बुधवार को केलंग मंदिर और वीरवार को अलियास शुक्रवार को छठे दिन जाकर यह जत्था मणिमहेश पहुंचेगा।
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