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Kullu News: देव मिलन से गूंजा गुशैणी, ब्रेलगा मेले में उमड़ी आस्था
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नाटी में जमकर झूमे ग्रामीण, देवी माता गाड़ा दुर्गा समेत कई देवताओं ने किया देव मिलन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुशैणी (कुल्लू)। तीर्थन घाटी के केंद्र गुशैणी में आश्विन माह की 10वीं प्रविष्टि को आयोजित ब्रेलगा मेला आस्था, देव परंपरा और लोक संस्कृति के संगम का गवाह बना। एक दिवसीय मेले में घाटी के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच देवी-देवताओं के देवरथों के पहुंचने से पूरा गुशैणी क्षेत्र देवमय हो उठा।
मेले में तीर्थन घाटी की आराध्य देवी गाड़ा दुर्गा के अलावा पेखड़ी के देवता लोमश ऋषि, नाही के देवता चौरासी सिद्ध, तिंदर और फरियाड़ी के देवता लक्ष्मी नारायण तथा जंहार के देवता विमु नाग समेत कई देवी-देवताओं ने सैकड़ों हारियानों और देवलुओं के साथ शिरकत की।
देवी-देवताओं के देवरथों का पारंपरिक देव मिलन मेले का मुख्य आकर्षण रहा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच देव मिलन की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देव परंपरा के इस अनूठे स्वरूप को देखा।
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माता गाड़ा दुर्गा के कारदार मुरारी लाल शर्मा, पुजारी हेमराज शर्मा और कोषाध्यक्ष केशव शर्मा ने बताया कि ब्रेलगा मेले की विशेष परंपरा के अनुसार गुशैणी में माता गाड़ा दुर्गा की पालकी के प्रवेश से पहले अन्य देवी-देवताओं के देवरथ मेले में नहीं पहुंचते। माता की पालकी के मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद ही अन्य देवी-देवता अपने देवलुओं और हारियानों के साथ मेले में पहुंचते हैं। इसके बाद देव मिलन की परंपरा निभाई जाती है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुशैणी (कुल्लू)। तीर्थन घाटी के केंद्र गुशैणी में आश्विन माह की 10वीं प्रविष्टि को आयोजित ब्रेलगा मेला आस्था, देव परंपरा और लोक संस्कृति के संगम का गवाह बना। एक दिवसीय मेले में घाटी के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच देवी-देवताओं के देवरथों के पहुंचने से पूरा गुशैणी क्षेत्र देवमय हो उठा।
मेले में तीर्थन घाटी की आराध्य देवी गाड़ा दुर्गा के अलावा पेखड़ी के देवता लोमश ऋषि, नाही के देवता चौरासी सिद्ध, तिंदर और फरियाड़ी के देवता लक्ष्मी नारायण तथा जंहार के देवता विमु नाग समेत कई देवी-देवताओं ने सैकड़ों हारियानों और देवलुओं के साथ शिरकत की।
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देवी-देवताओं के देवरथों का पारंपरिक देव मिलन मेले का मुख्य आकर्षण रहा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच देव मिलन की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देव परंपरा के इस अनूठे स्वरूप को देखा।
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माता गाड़ा दुर्गा के कारदार मुरारी लाल शर्मा, पुजारी हेमराज शर्मा और कोषाध्यक्ष केशव शर्मा ने बताया कि ब्रेलगा मेले की विशेष परंपरा के अनुसार गुशैणी में माता गाड़ा दुर्गा की पालकी के प्रवेश से पहले अन्य देवी-देवताओं के देवरथ मेले में नहीं पहुंचते। माता की पालकी के मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद ही अन्य देवी-देवता अपने देवलुओं और हारियानों के साथ मेले में पहुंचते हैं। इसके बाद देव मिलन की परंपरा निभाई जाती है। संवाद