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पांच फुट बर्फ के बीच माईनस डिग्री पुजारी ने लगाई डुबकी
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माइनस डिग्री तापमान में पुजारी ने लगाई झील में डुबकी
देवता चोतरू नाग के पुजारी ने सरयोलसर झील में निभाई परंपरा
रोशन ठाकुर
कुल्लू। पांच फुट बर्फ से लकदक सरयोलसर झील में देवता के पुजारी ने माइनस डिग्री तापमान में डुबकी लगाई है। समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजमान माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर इन दिनों बर्फबारी से लकदक है। कड़ाके की ठंड से जहां झील का पानी लगभग एक फीट तक जम गया है। वहीं झील के ऊपर पांच फुट बर्फ की मोटी परत जमी है। जाड़े के मौसम में जहां घर से बाहर निकला मुश्किल हो जाता है। वहीं देवता चोतरू नाग के नवनियुक्त पुजारी संतोष कुमार ने देवता के आदेशों का निवर्हन करते हुए झील के ठंडे पानी में स्नान किया। उनके साथ गए महेंद्र कुमार, विनोद कुमार, बिहारी लाल, हीरा लाल, रमेश कुमार, देवता के गूर सुर्जन सिंह ने कहा कि उन्होंने बर्फ के बीच सरयोलयर पहुंचने में पांच घंटे का समय लगा और उन्हें शोधा गांव स्थित देवता चोतरू नाग के देवालय से 11 किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि देवता का फागली उत्सव 14 फरवरी से शुरू हो रहा है, ऐसे में देवता ने संतोष कुमार को नया पुजारी नियुक्त किया है। देवता के आदेश पर उन्होंने 11 फरवरी को सरयोलसर झील में शाही स्नान किया है। महेंद्र कुमार, विनोद कुमार और बिहारी लाल ने कहा कि झील बर्फ से पूरी तरह से दब गई है। पुजारी को स्नान करवाने के लिए उन्हें पहले झील के बीचोंबीच से बर्फ हटानी पड़ी और इसके बाद झील के ऊपर जमे पानी की परत को तोड़ना पड़ा। देवता के गूर सुर्जन सिंह ने कहा 14 फरवरी से होने वाली फागली का नेतृत्व देवता के नवनियुक्त पुजारी करेंगे। उल्लेखनीय है कि जाड़े के मौसम में सरयोलसर में भारी बर्फबारी पड़ने से माता बूढ़ी नागिन के कपाट को पांच माह तक के लिए बंद कर दिया जाता है और सर्दी के दिनों यहां पहुंचना किसी खतरे से कम नहीं है।
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देवता चोतरू नाग के पुजारी ने सरयोलसर झील में निभाई परंपरा
रोशन ठाकुर
कुल्लू। पांच फुट बर्फ से लकदक सरयोलसर झील में देवता के पुजारी ने माइनस डिग्री तापमान में डुबकी लगाई है। समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजमान माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर इन दिनों बर्फबारी से लकदक है। कड़ाके की ठंड से जहां झील का पानी लगभग एक फीट तक जम गया है। वहीं झील के ऊपर पांच फुट बर्फ की मोटी परत जमी है। जाड़े के मौसम में जहां घर से बाहर निकला मुश्किल हो जाता है। वहीं देवता चोतरू नाग के नवनियुक्त पुजारी संतोष कुमार ने देवता के आदेशों का निवर्हन करते हुए झील के ठंडे पानी में स्नान किया। उनके साथ गए महेंद्र कुमार, विनोद कुमार, बिहारी लाल, हीरा लाल, रमेश कुमार, देवता के गूर सुर्जन सिंह ने कहा कि उन्होंने बर्फ के बीच सरयोलयर पहुंचने में पांच घंटे का समय लगा और उन्हें शोधा गांव स्थित देवता चोतरू नाग के देवालय से 11 किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि देवता का फागली उत्सव 14 फरवरी से शुरू हो रहा है, ऐसे में देवता ने संतोष कुमार को नया पुजारी नियुक्त किया है। देवता के आदेश पर उन्होंने 11 फरवरी को सरयोलसर झील में शाही स्नान किया है। महेंद्र कुमार, विनोद कुमार और बिहारी लाल ने कहा कि झील बर्फ से पूरी तरह से दब गई है। पुजारी को स्नान करवाने के लिए उन्हें पहले झील के बीचोंबीच से बर्फ हटानी पड़ी और इसके बाद झील के ऊपर जमे पानी की परत को तोड़ना पड़ा। देवता के गूर सुर्जन सिंह ने कहा 14 फरवरी से होने वाली फागली का नेतृत्व देवता के नवनियुक्त पुजारी करेंगे। उल्लेखनीय है कि जाड़े के मौसम में सरयोलसर में भारी बर्फबारी पड़ने से माता बूढ़ी नागिन के कपाट को पांच माह तक के लिए बंद कर दिया जाता है और सर्दी के दिनों यहां पहुंचना किसी खतरे से कम नहीं है।