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सेब तुड़ान के बाद स्प्रे करने में जुटे बागवान
Updated Thu, 12 Oct 2017 10:23 PM IST
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खराहल (कुल्लू)। जिला में लगभग सेब का सीजन खत्म हो गया है। कुछ ऊंचे इलाके में चुनिंदा सेब ही बगीचों में ही फल रह गया है। अधिकतर इलाकों मेें सेब सीजन समाप्त हो गया है। अब बागवानों ने सेब के तुड़ान के बाद ब्लाईटाक्स और यूरिया का छिड़काव करना आरंभ कर दिया है। इसके लिए विशेषज्ञों ने भी बागवानों को स्प्रे करने की सलाह दी है।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के पौधों पर तुड़ाने के समय पौधों की शाखाएं टूटने के कारण कई जगह पर जख्म हो जाता है। ऐसे कई तरह के कीट पनपते हैैं। लिहाजा इन की रोकथाम के लिए सेब के तुड़ान के बाद ब्लाईटाक्स की स्प्रे करनी अति आवश्यक है। घाटी का बागवान अमित, नवीन, महेश शर्मा, राज, मास्टर चंदेराम, सतीश, बुद्धि प्रकाश, रोशन लाल, जय चंद, चुनी लाल, सुरेश, कमल, राजेंद्र तथा चमन आदि के अनुसार सेब का सीजन समाप्त हो गया है। अब बगीचों में कैंकर की रोकथाम के लिए ब्लाईटाक्स का छिड़काव किया जा रहा है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बगीचों के पौधों के पत्ते अधिक रोग के कारण पीले हो कर गिर चुके हैं। उनके पर यूरिया का छिड़काव 0.5 प्रतिशत करना चाहिए। ऐसे आगामी वर्ष रोग से निजात मिल जाएगी। लिहाजा बागवानी विभाग बागवानों को ऐसे बगीचों में यूरिया का छिड़काव करने सलाह दी है।
इस संबंध में बागवानी विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर के अनुसार तुड़ान के बाद बागवानों को ब्लाईटाक्स 600 ग्राम दो सौ लीटर में मिलाकर छिड़काव करने से कैंकर जैसे रोग से निजात मिल जाएगी। जिन बगीचों में रोग के कारण पत्ते गिर चुके है उनके ऊपर यूरिया का छिड़काव 10 किलोग्राम प्रति दो सौ लीटर पानी में मिलाकर करने से पत्ते पूर्ण रूप से गल जाएंगे। जिससे रोग आगामी साल नियंत्रण में रहेगा।
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बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के पौधों पर तुड़ाने के समय पौधों की शाखाएं टूटने के कारण कई जगह पर जख्म हो जाता है। ऐसे कई तरह के कीट पनपते हैैं। लिहाजा इन की रोकथाम के लिए सेब के तुड़ान के बाद ब्लाईटाक्स की स्प्रे करनी अति आवश्यक है। घाटी का बागवान अमित, नवीन, महेश शर्मा, राज, मास्टर चंदेराम, सतीश, बुद्धि प्रकाश, रोशन लाल, जय चंद, चुनी लाल, सुरेश, कमल, राजेंद्र तथा चमन आदि के अनुसार सेब का सीजन समाप्त हो गया है। अब बगीचों में कैंकर की रोकथाम के लिए ब्लाईटाक्स का छिड़काव किया जा रहा है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बगीचों के पौधों के पत्ते अधिक रोग के कारण पीले हो कर गिर चुके हैं। उनके पर यूरिया का छिड़काव 0.5 प्रतिशत करना चाहिए। ऐसे आगामी वर्ष रोग से निजात मिल जाएगी। लिहाजा बागवानी विभाग बागवानों को ऐसे बगीचों में यूरिया का छिड़काव करने सलाह दी है।
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इस संबंध में बागवानी विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर के अनुसार तुड़ान के बाद बागवानों को ब्लाईटाक्स 600 ग्राम दो सौ लीटर में मिलाकर छिड़काव करने से कैंकर जैसे रोग से निजात मिल जाएगी। जिन बगीचों में रोग के कारण पत्ते गिर चुके है उनके ऊपर यूरिया का छिड़काव 10 किलोग्राम प्रति दो सौ लीटर पानी में मिलाकर करने से पत्ते पूर्ण रूप से गल जाएंगे। जिससे रोग आगामी साल नियंत्रण में रहेगा।
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