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माघ शौयरी पर जूब देकर लेंगे बड़ों का आशीर्वाद
Updated Sat, 13 Jan 2018 06:37 PM IST
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माघ शौयरी पर जूब देकर लेंगे बड़ों का आशीर्वाद
अब जिला में सात दिनों तक रहेगी माघी पर्व की धूम
मेहमानों को परोसे जाएंगे पारंपरिक व्यंजन
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले माघी पर्व को जिला कुल्लू में रविवार को मनाया जाएगा। पर्व के मौके पर जूब देकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाएगा। माघी पर्व के अवसर पर मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन भी परोसे जाएंगे। पारंपरिक व्यंजनों की महक से कुल्लू घाटी महक उठेगी। माघ संक्रांति को माघ शौयरी के नाम से जाना जाता है। इस दिन सबसे पहले अपने ईष्ट देवताओं की पूजा-अर्चना की जाएगी। देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद जूब देकर लिया जाएगा। जूब देने का सिलसिला अगले सात दिनों तक चलता रहेगा।
मकर संक्रांति शुरू होने के साथ ही जिला में दियाली और देव कार्यक्रम भी शुरू होंगे। इसके साथ ही घर में आने वाले मेहमानों के लिए पारंपरिक व्यंजन खिचड़ी, भल्ले इत्यादि परोसे जाएंगे। गौर रहे कि उझी घाटी, लगघाटी, मणिकर्ण घाटी, सैंज, बंजार और आनी में माघी पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस संबंध में खराहल घाटी के सुनील राणा, हेमराज शर्मा, मणिकर्ण घाटी के जगदीश कुमार और टेक चंद ने कहा कि माघी पर्व खुशियों का त्यौहार है। इस दिन जूब बांटने की परंपरा है। कुल्लू में साल में दो बार जूब बांटी जाती है। देवभूमि की प्राचीन संस्कृति इन त्यौहारों के साथ आज भी जीवित है।
वहीं जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि माघी पर जहां देवी-देवताओं की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं देवता को जूब देने की भी परंपरा है। माघी पर्व के अवसर पर मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन भी परोसे जाएंगे।
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अब जिला में सात दिनों तक रहेगी माघी पर्व की धूम
मेहमानों को परोसे जाएंगे पारंपरिक व्यंजन
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले माघी पर्व को जिला कुल्लू में रविवार को मनाया जाएगा। पर्व के मौके पर जूब देकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाएगा। माघी पर्व के अवसर पर मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन भी परोसे जाएंगे। पारंपरिक व्यंजनों की महक से कुल्लू घाटी महक उठेगी। माघ संक्रांति को माघ शौयरी के नाम से जाना जाता है। इस दिन सबसे पहले अपने ईष्ट देवताओं की पूजा-अर्चना की जाएगी। देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद जूब देकर लिया जाएगा। जूब देने का सिलसिला अगले सात दिनों तक चलता रहेगा।
मकर संक्रांति शुरू होने के साथ ही जिला में दियाली और देव कार्यक्रम भी शुरू होंगे। इसके साथ ही घर में आने वाले मेहमानों के लिए पारंपरिक व्यंजन खिचड़ी, भल्ले इत्यादि परोसे जाएंगे। गौर रहे कि उझी घाटी, लगघाटी, मणिकर्ण घाटी, सैंज, बंजार और आनी में माघी पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस संबंध में खराहल घाटी के सुनील राणा, हेमराज शर्मा, मणिकर्ण घाटी के जगदीश कुमार और टेक चंद ने कहा कि माघी पर्व खुशियों का त्यौहार है। इस दिन जूब बांटने की परंपरा है। कुल्लू में साल में दो बार जूब बांटी जाती है। देवभूमि की प्राचीन संस्कृति इन त्यौहारों के साथ आज भी जीवित है।
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वहीं जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि माघी पर जहां देवी-देवताओं की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं देवता को जूब देने की भी परंपरा है। माघी पर्व के अवसर पर मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन भी परोसे जाएंगे।
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