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देवता काशू नारायण के दरबार में सच व झूठ से उठता है पर्दा
Updated Sun, 21 Oct 2018 10:40 PM IST
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देवता कशू नारायण के दरबार में होता है सच और झूठ का फैसला
न्याय के लिए देवता कशू नारायण के दरबार में सजती है सभा
दोनों पक्षों के लोग रहते हैं मौजूद, देवता का आदेश होता है सर्वोपरि
संजीव कुमार
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी के बनाउगी के कशू नारायण के दरबार में सच और झूठ से पर्दा उठता है। न्याय के लिए देवता के दरबार में सभा सजती है, जिसमें दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहते हैं। इस दौरान देव विधि के माध्यम से सच और झूठ का फैसला किया जाता है। देवता का आदेश दोनों पक्षों के लिए सर्वोपरि होता है।
कुल्लू घाटी समेत प्रदेश के विभिन्न भागों से कोर्ट कचहरी के चक्कर से परेशान लोग देवता कशू नारायण के दरबार पहुंचते हैं और यहां सच और झूठ का पता लगाते हैं। इसके लिए देवता के दरबार में दोनों पक्ष आपसी सहमति से पहुंचते हैं और न्याय की गुहार लगाते हैं। दोनों पक्षों की गुहार को स्वीकार करते हुए देव विधि के माध्यम से दोनों पक्षों के लोगों के समक्ष ही झूठ और सच का फैसला होता है। जिसे टाला भी नहीं जाता है। देव नीति में बंधे हुए लोग इस फैसले को सर्वोपरि मानते हुए स्वीकार करते हैं और धरातल स्तर पर लागू भी करते हैं। हर माह देवता के दरबार में ऐसे चार से पांच केस पहुंचते हैं। जिनका निपटारा देव परंपराओं के अनुसार होता है। देवता के कारदार मोहन लाल ठाकुर का कहना है कि कुल्लू जिला, हिमाचल और दूसरे राज्यों से देवता कशू नारायण के दरबार में लोग अपने मामलों को लेकर पहुंचते हैं। जिनका समाधान देव परंपरा के अनुसार किया जाता है। देव नीति के अनुसार दोनों पक्षों को दरबार में बैठाया जाता है और उनके सच झूठ का फैसला दिया जाता है। पुजारी मनीष शर्मा ने कहा कि देवता के दरबार में कई तरफ के फैसले दिए जाते हैं। जिन्हें सब स्वीकारते हैं।
बॉक्स
सोने का बना है देवरथ
देवता कशू नारायण का देवरथ सोने से जड़ा हुआ है। हर वर्ष देवता दशहरा उत्सव में शिरकत करते हैं। यहां दर्शनों के लिए उनके अस्थायी शिविर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
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न्याय के लिए देवता कशू नारायण के दरबार में सजती है सभा
दोनों पक्षों के लोग रहते हैं मौजूद, देवता का आदेश होता है सर्वोपरि
संजीव कुमार
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी के बनाउगी के कशू नारायण के दरबार में सच और झूठ से पर्दा उठता है। न्याय के लिए देवता के दरबार में सभा सजती है, जिसमें दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहते हैं। इस दौरान देव विधि के माध्यम से सच और झूठ का फैसला किया जाता है। देवता का आदेश दोनों पक्षों के लिए सर्वोपरि होता है।
कुल्लू घाटी समेत प्रदेश के विभिन्न भागों से कोर्ट कचहरी के चक्कर से परेशान लोग देवता कशू नारायण के दरबार पहुंचते हैं और यहां सच और झूठ का पता लगाते हैं। इसके लिए देवता के दरबार में दोनों पक्ष आपसी सहमति से पहुंचते हैं और न्याय की गुहार लगाते हैं। दोनों पक्षों की गुहार को स्वीकार करते हुए देव विधि के माध्यम से दोनों पक्षों के लोगों के समक्ष ही झूठ और सच का फैसला होता है। जिसे टाला भी नहीं जाता है। देव नीति में बंधे हुए लोग इस फैसले को सर्वोपरि मानते हुए स्वीकार करते हैं और धरातल स्तर पर लागू भी करते हैं। हर माह देवता के दरबार में ऐसे चार से पांच केस पहुंचते हैं। जिनका निपटारा देव परंपराओं के अनुसार होता है। देवता के कारदार मोहन लाल ठाकुर का कहना है कि कुल्लू जिला, हिमाचल और दूसरे राज्यों से देवता कशू नारायण के दरबार में लोग अपने मामलों को लेकर पहुंचते हैं। जिनका समाधान देव परंपरा के अनुसार किया जाता है। देव नीति के अनुसार दोनों पक्षों को दरबार में बैठाया जाता है और उनके सच झूठ का फैसला दिया जाता है। पुजारी मनीष शर्मा ने कहा कि देवता के दरबार में कई तरफ के फैसले दिए जाते हैं। जिन्हें सब स्वीकारते हैं।
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सोने का बना है देवरथ
देवता कशू नारायण का देवरथ सोने से जड़ा हुआ है। हर वर्ष देवता दशहरा उत्सव में शिरकत करते हैं। यहां दर्शनों के लिए उनके अस्थायी शिविर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
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