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अब नेपाली नहीं बन सकेंगे चरस माफिया का मोहरा
Updated Sun, 04 Feb 2018 09:24 PM IST
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कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में अब चरस माफिया नेपालियों को मोहरा नहीं बना सकेगा। नेपालियों के कंधों पर बंदूक रखकर चांदी कूटने वाले चरस माफिया पर वन विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर शिकंजा कसने का प्लान बना लिया है। इसके तहत वन विभाग जल्द चरस के लिए बदनाम मणिकर्ण घाटी में एक अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत घर में नेपालियों को कामकाज के लिए रखने वाले घर मालिकों से विभाग शपथ पत्र लेगा। अगर कहीं नेपाली किसी भी चरस बीजने या चरस के साथ खेप के साथ पकड़ा जाता है तो इसका जवाब मालिक को देना होगा। चरस माफिया के काम को नेपाली आसान बना देते हैं। मार्च और अप्रैल में बड़ी संख्या में नेपाली मजदूरों को दिहाड़ी देकर चरस बीजने के काम में लगाया जाता है। इसके बाद जब सितंबर और अक्तूबर में जैसे ही चरस की खेप तैयार हो जाती है तो नेपालियों से चरस माफिया के लोग चरस निकालने का काम करवाते हैं। वहीं, पैसों का लालच देकर चरस की खेप को जिले के अंदर या बाहर पहुंचाने के लिए नेपालियों का ही इस्तेमाल किया जाता है। अब तक कई नेपाली चरस के कारण जेल की सलाखों के पीछे हैं। वन भूमि पर हो रही चरस की बिजाई को रोकने और चरस माफिया पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने यह प्लान तैयार किया है। मणिकर्ण घाटी के बुद्धिजीवियों ने वन विभाग और पुलिस के इस कदम को सराहनीय बताया है। इस योजना के तहत चरस माफिया अब नेेपालियों को चरस तस्करी में इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इस्तेमाल करने पर नेपालियों को नौकरी देने वाले मालिक पर तुरंत शिकंजा कस जाएगा। इधर, वन विभाग के डीएफओ पार्वती हीरालाल राणा ने कहा कि नेपाली को घर में रखने वालों से शपथ पत्र लिया जाएगा। अगर नेपाली चरस बीजते और चरस की खेप के साथ पकड़ा जाता है तो घर मालिक को जवाब देना होगा। विभाग पुलिस के साथ मिलकर इस अभियान को शुरू करेगा।
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