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बारिश से आड़ू, प्लम की फ्लावरिंग प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो
पतलीकूहल/कुल्लू। पिछले करीब दो माह से हो रही बारिश से बागीचों में नमी बनी हुई है। लेकिन मार्च के दूसरे सप्ताह में अब फलदार पेड़ों में फ्लावरिंग का समय है। खासकर मेरिपोजा आड़ू और प्लम के पेड़ों पर कलियां खिलने लगी हैं। लेकिन आसमान में बादल छाए रहने से फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है।
जानकारों का मानना है कि फ्लावरिंग के दौरान बगीचों में खिले धूप की जरूरत रहती है। लेकिन पिछले दिनों से जिस बारिश को देख बागवानों के चेहरे खिल रहे थे, अब वही परेशानी का सबब बन रही है। मौसम की इस बेरुखी से घाटी के किसान और बागवान अब मायूस दिख रहे हैं। बागवानों को यह भी चिंता सता रही है कि अगर मौसम के तेवर ऐसे ही रहे तो उनकी नकदी फसलों को नुकसान हो सकता है।
सेब की फ्लावरिंग में करीब दो सप्ताह का समय बचा है। लेकिन पहाड़ों पर गिरी भारी बर्फ के चलते खिली धूप में भी बादल उमड़ सकते हैं। इससे उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है। बागवान अमरचंद, देवेन, खेखराम, विकास, लोकराज, सुरेंद्र, करतार, देवेंद्र, रमेश, धनीराम, राजेश, कुर्मदत्त और बलदेव ठाकुर ने कहा कि इस बार मौसम पहले ठीक रहा। लेकिन अब बारिश बागवानी में बाधा बन रही है। उधर, बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के वैज्ञानिक डॉ. जयंत का कहना है कि घाटी में फलों की बेहतरीन पैदावार के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। अगर ऐसा न हो तो फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
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पतलीकूहल/कुल्लू। पिछले करीब दो माह से हो रही बारिश से बागीचों में नमी बनी हुई है। लेकिन मार्च के दूसरे सप्ताह में अब फलदार पेड़ों में फ्लावरिंग का समय है। खासकर मेरिपोजा आड़ू और प्लम के पेड़ों पर कलियां खिलने लगी हैं। लेकिन आसमान में बादल छाए रहने से फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है।
जानकारों का मानना है कि फ्लावरिंग के दौरान बगीचों में खिले धूप की जरूरत रहती है। लेकिन पिछले दिनों से जिस बारिश को देख बागवानों के चेहरे खिल रहे थे, अब वही परेशानी का सबब बन रही है। मौसम की इस बेरुखी से घाटी के किसान और बागवान अब मायूस दिख रहे हैं। बागवानों को यह भी चिंता सता रही है कि अगर मौसम के तेवर ऐसे ही रहे तो उनकी नकदी फसलों को नुकसान हो सकता है।
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सेब की फ्लावरिंग में करीब दो सप्ताह का समय बचा है। लेकिन पहाड़ों पर गिरी भारी बर्फ के चलते खिली धूप में भी बादल उमड़ सकते हैं। इससे उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है। बागवान अमरचंद, देवेन, खेखराम, विकास, लोकराज, सुरेंद्र, करतार, देवेंद्र, रमेश, धनीराम, राजेश, कुर्मदत्त और बलदेव ठाकुर ने कहा कि इस बार मौसम पहले ठीक रहा। लेकिन अब बारिश बागवानी में बाधा बन रही है। उधर, बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के वैज्ञानिक डॉ. जयंत का कहना है कि घाटी में फलों की बेहतरीन पैदावार के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। अगर ऐसा न हो तो फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
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