{"_id":"64fdfc05c42a6ba9d50f53a8","slug":"2500-mental-patients-found-in-kullu-in-three-years-kullu-news-c-89-1-ssml1015-6698-2023-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: कुल्लू में तीन साल में मिले 2,500 मानसिक रोगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: कुल्लू में तीन साल में मिले 2,500 मानसिक रोगी
Sun, 10 Sep 2023 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 10 Sep 2023 10:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुल्लू। वर्तमान समय में मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई मामलों में मरीज आत्महत्या तक कर रहे हैं। मानसिक बीमारी का उपचार संभव है। अगर लक्षणों की पहचान समय पर की जाए और मरीज को बेहतर काउंसलिंग मिले तो वह स्वस्थ हो सकता है।
यह बात नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कही। कुल्लू में रविवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि जिला कुल्लू में पिछले तीन सालों में 2,500 मानसिक रोगी मिले हैं। इनमें ज्यादातर मरीज उपचार और काउंसलिंग के उपरांत स्वस्थ हो चुके हैं।
जिले के नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र भुंतर में रोजाना की ओपीडी 50 से 60 रहती है। जागरूकता बढ़ने से ही इस भयानक बीमारी की रोकथाम संभव है। कहा कि अकेले रहने की इच्छा, स्वयं पर विश्वास कम होना, ज्यादा गुस्सा करना, कानों में आवाज आना, एक ही विचार बार-बार आना, एक ही काम करते रहना आदि मानसिक बीमारी के लक्षण हैं। इस बीमारी का इलाज संभव है। लक्षण दिखने पर मरीज चिकित्सक से परामर्श करें। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
यह बात नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कही। कुल्लू में रविवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि जिला कुल्लू में पिछले तीन सालों में 2,500 मानसिक रोगी मिले हैं। इनमें ज्यादातर मरीज उपचार और काउंसलिंग के उपरांत स्वस्थ हो चुके हैं।
विज्ञापन
जिले के नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र भुंतर में रोजाना की ओपीडी 50 से 60 रहती है। जागरूकता बढ़ने से ही इस भयानक बीमारी की रोकथाम संभव है। कहा कि अकेले रहने की इच्छा, स्वयं पर विश्वास कम होना, ज्यादा गुस्सा करना, कानों में आवाज आना, एक ही विचार बार-बार आना, एक ही काम करते रहना आदि मानसिक बीमारी के लक्षण हैं। इस बीमारी का इलाज संभव है। लक्षण दिखने पर मरीज चिकित्सक से परामर्श करें। संवाद
विज्ञापन