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डोहनी मोड़ से कोकसर पहुंचना मुश्किल
Updated Fri, 03 Aug 2018 07:33 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। रोहतांग दर्रा से जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति होकर सरहद को जाने वाली सड़क गड्ढों में तबदील हो गई है। घाटी की बदहाल सड़कों को लेकर कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा पहले ही मुख्यमंत्री के सामने बीआरओ की पोल खोल चुके हैं। हाल ही में हुई बारिश के बाद डोहनी मोड़ होकर कोकसर पहुंचना मुश्किल हो गया है।
डोहनी मोड़ में दलदल में फंस कर आम लोगों के साथ सैलानियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश होने पर छोटे वाहनों का यहां से गुजरना संभव नहीं है। बीते दिन दलदल में फंस कर करीब एक दर्जन छोटे वाहनों के चैंबर और बंपर फट गए हैं। वाहन चालक राजेश, अमीर, रोहित, टशी व अशोक ने बताया कि डोहनी मोड़ पर दलदल की वजह से मनाली से केलांग का सफर जोखिम भरा हो गया है। अशोक ने बताया कि वह एक साल बाद अपने बच्चों के साथ कुल्लू से लाहौल पैतृक गांव को निकले। लेकिन डोहनी मोड़ में दलदल में फंस कर उनके वाहन का चैंबर फट गया। बीआरओ चाहे तो डोजर से मलबे को हटा सकता है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। टशी ने बताया कि दलदल में फंसने वाले वाहनों को रामभरोसे छोड़ा जाता है। वाहन चालक को किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती। कभी तो दलदल में तीन से चार घंटे तक वाहन फंस रहे हैं। सैलानी रंजीत आहूजा, किरण और विवेक ने बताया कि मनाली से केलांग के बीच डोहनी मोड़ के आसपास का करीब छह किमी का हिस्सा बहुत खराब है। इस छह किमी के फासले को तय करने में तीन घंटे का वक्त लग रहा है। ऐसे हालात में पर्यटक दोबारा घाटी का रुख करने से कतराते हैं। कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि बीआरओ के काम से जनता संतुष्ट नहीं है। कहा कि ग्रांफू-काजा और तांदी-संसारी नाला सड़क को लोनिवि के सुपुर्द करने की सीएम और केंद्र सरकार से अपील की गई है। इधर, बीआरओ के कमांडर कर्नल एसके अवस्थी ने कहा कि बारिश के कारण डोहनी मोड़ में छोटे वाहन चालकों को दिक्कत हो रही है। मलबेे को हटाने के लिए वहां पर एक डोजर तैनात किया जा रहा है।
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। रोहतांग दर्रा से जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति होकर सरहद को जाने वाली सड़क गड्ढों में तबदील हो गई है। घाटी की बदहाल सड़कों को लेकर कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा पहले ही मुख्यमंत्री के सामने बीआरओ की पोल खोल चुके हैं। हाल ही में हुई बारिश के बाद डोहनी मोड़ होकर कोकसर पहुंचना मुश्किल हो गया है।
डोहनी मोड़ में दलदल में फंस कर आम लोगों के साथ सैलानियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश होने पर छोटे वाहनों का यहां से गुजरना संभव नहीं है। बीते दिन दलदल में फंस कर करीब एक दर्जन छोटे वाहनों के चैंबर और बंपर फट गए हैं। वाहन चालक राजेश, अमीर, रोहित, टशी व अशोक ने बताया कि डोहनी मोड़ पर दलदल की वजह से मनाली से केलांग का सफर जोखिम भरा हो गया है। अशोक ने बताया कि वह एक साल बाद अपने बच्चों के साथ कुल्लू से लाहौल पैतृक गांव को निकले। लेकिन डोहनी मोड़ में दलदल में फंस कर उनके वाहन का चैंबर फट गया। बीआरओ चाहे तो डोजर से मलबे को हटा सकता है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। टशी ने बताया कि दलदल में फंसने वाले वाहनों को रामभरोसे छोड़ा जाता है। वाहन चालक को किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती। कभी तो दलदल में तीन से चार घंटे तक वाहन फंस रहे हैं। सैलानी रंजीत आहूजा, किरण और विवेक ने बताया कि मनाली से केलांग के बीच डोहनी मोड़ के आसपास का करीब छह किमी का हिस्सा बहुत खराब है। इस छह किमी के फासले को तय करने में तीन घंटे का वक्त लग रहा है। ऐसे हालात में पर्यटक दोबारा घाटी का रुख करने से कतराते हैं। कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि बीआरओ के काम से जनता संतुष्ट नहीं है। कहा कि ग्रांफू-काजा और तांदी-संसारी नाला सड़क को लोनिवि के सुपुर्द करने की सीएम और केंद्र सरकार से अपील की गई है। इधर, बीआरओ के कमांडर कर्नल एसके अवस्थी ने कहा कि बारिश के कारण डोहनी मोड़ में छोटे वाहन चालकों को दिक्कत हो रही है। मलबेे को हटाने के लिए वहां पर एक डोजर तैनात किया जा रहा है।
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