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माता गाड़ादुर्गा ने गुशैणी में किया शाही स्नान
Updated Sun, 09 Sep 2018 06:44 PM IST
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माता गाड़ादुर्गा ने किया शाही स्नान
हुम पर्व धूमधाम से मनाया, भव्य नजारे को देखने के लिए उमड़े श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो
गुशैणी (कुल्लू)। तीर्थन घाटी की आराध्य माता गाड़ादुर्गा माता का हुम पर्व गुशैणी में रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर तीन कोठी नोहांडा, तुंग व शरची की आराध्य माता गाडुादुर्गा ने लाव लश्कर के साथ गुशैणी के दुर्गा घाट में तीर्थन नदी में शाही स्नान किया। इस भव्य नजारे को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
माता गाड़ादुर्गा के कारदार मुरारी लाल शर्मा, गूर पदम देव शर्मा ने कहा कि माता का रथ स्नान के लिए बादल मंदिर से लाव लश्कर के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गुशैणी मंदिर स्थल तक लाया गया। यहां पर विशेष पूजा-पाठ के बाद माता का रथ दुर्गा घाट में शाही स्नान के लिए तीर्थन नदी के मुहाने पर लाया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ माता गाड़ादुर्गा ने शाही स्नान किया। गौर रहे कि कठौरी अमावस्या के दिन जिसे कुशा अमावस्या के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन माता के कन्या रूप ने इस नदी में समाकर शिल्ला का रूप धारण किया था। यह मूर्ति रूपी शिल्ला आज भी गाड़ादुर्गा मंदिर में मौजूद है। सदियों से निभाई जा रही इस परंपरा को देवलुओं व हारियानों ने बखूबी निभाया। हारियान दिनेश्वर डोड, रमेश ठाकुर, हरीश शर्मा, तिलकराज ने कहा कि शाही स्नान के बाद माता बांदल गांव के लिए रवाना हुई।
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हुम पर्व धूमधाम से मनाया, भव्य नजारे को देखने के लिए उमड़े श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो
गुशैणी (कुल्लू)। तीर्थन घाटी की आराध्य माता गाड़ादुर्गा माता का हुम पर्व गुशैणी में रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर तीन कोठी नोहांडा, तुंग व शरची की आराध्य माता गाडुादुर्गा ने लाव लश्कर के साथ गुशैणी के दुर्गा घाट में तीर्थन नदी में शाही स्नान किया। इस भव्य नजारे को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
माता गाड़ादुर्गा के कारदार मुरारी लाल शर्मा, गूर पदम देव शर्मा ने कहा कि माता का रथ स्नान के लिए बादल मंदिर से लाव लश्कर के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गुशैणी मंदिर स्थल तक लाया गया। यहां पर विशेष पूजा-पाठ के बाद माता का रथ दुर्गा घाट में शाही स्नान के लिए तीर्थन नदी के मुहाने पर लाया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ माता गाड़ादुर्गा ने शाही स्नान किया। गौर रहे कि कठौरी अमावस्या के दिन जिसे कुशा अमावस्या के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन माता के कन्या रूप ने इस नदी में समाकर शिल्ला का रूप धारण किया था। यह मूर्ति रूपी शिल्ला आज भी गाड़ादुर्गा मंदिर में मौजूद है। सदियों से निभाई जा रही इस परंपरा को देवलुओं व हारियानों ने बखूबी निभाया। हारियान दिनेश्वर डोड, रमेश ठाकुर, हरीश शर्मा, तिलकराज ने कहा कि शाही स्नान के बाद माता बांदल गांव के लिए रवाना हुई।
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