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पोलियो वैक्सीन मामले में बैकफुट पर स्वास्थ्य विभाग
Updated Wed, 31 Jan 2018 11:15 PM IST
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राकेश राणा
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कुल्लू।
पोलियो वैक्सीन मामले में बड़ी चूक होने के बाद स्वास्थ्य महकमा अब अपने अधिकारियों को बचाने में जुट गया है। जयराम सरकार भी इस मामले में बैकफुट पर है और अभी तक इस मामले में लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है, जबकि हाल ही में धर्मपुर विस क्षेत्र में आईपीएच मंत्री पानी के टैंक सफाई में लापरवाही पर अधिकारियों को सस्पेंड कर चुके हैं, लेकिन सैकड़ों बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
प्लस पोलियो जैसे राष्ट्रीय अभियान में चूक करने वाले अधिकारियों के प्रति नरमी दिखाई जा रही है। मामले में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय स्वास्थ्य निदेशालय उनके पक्ष में पैरवी कर रहा है और रोहतांग टनल प्रबंधन व लाहौल-स्पीति जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों पर अनुमति न मिलने की जिम्मेवारी डाल रहा है। आधिकारिक तौर पर 28 जनवरी से पहले डीसी लाहौल-स्पीति से रोहतांग सुरंग से वैक्सीन लाने को लेकर कोई आग्रह भी नहीं किया गया। 25 जनवरी को लाहौल घाटी के लिए हेलीकॉप्टर उड़ान के माध्यम से यह वैक्सीन पहुंचाई जानी थी, लेकिन उड़ान न होने पर स्वास्थ्य विभाग संवेदनशील नहीं रहा है और रोहतांग टनल से वैक्सीन लाने के बजाय डीसी लाहौल-स्पीति अश्विनी कुमार चौधरी को मार्च-अप्रैल माह में पल्स पोलियो अभियान चलाने की जानकारी दी।
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बाद में मामला मीडिया में उछलने पर आनन-फानन गत मंगलवार को टनल के जरिये यह वैक्सीन लाहौल घाटी पहुंचाई और चार फरवरी को अभियान तिथि घोषित की गई। इधर, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर का तर्क है कि विभाग के छोटे अधिकारियों की टनल बीआरओ अधिकारियों ने नहीं सुनी व वैक्सीन ले जाने के लिए अनुमति नहीं मिल पाई और हेलीकाप्टर उड़ान भी नहीं हो पाई। बाद में डीसी लाहौल-स्पीति के हस्तक्षेप के बाद ही टनल होकर वैक्सीन को घाटी तक पहुंचाया गया है। स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी होने के बाद निदेशक भी इस मामले में पूर्व में देरी से ही पोलियो ड्रॉप्स पिलाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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इधर, डीसी लाहौल-स्पीति अश्विनी कुमार चौधरी का कहना है कि 25 जनवरी को उड़ान न होने पर वैक्सीन न आने पर स्वास्थ्य विभाग ने बाद में अभियान चलाने की जानकारी दी। इस दौरान रोहतांग टनल के जरिये वैक्सीन घाटी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई आग्रह नहीं किया गया। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार भी इस मामले में कार्रवाई के बजाय स्वास्थ्य निदेशालय पर ही जिम्मेवारी डाल रहे हैं।
लापरवाही साफ, कार्रवाई से बच रही सरकार : जस्पा
जिप सदस्य सुदर्शन जस्पा, आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता सुदर्शन ठाकुर का कहना है कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही जब स्पष्ट है तो सरकार कार्रवाई से क्यों बच रही है। सरकार के इस रवैये से साफ हो गया है कि कांग्रेस ओर भाजपा सरकार में कोई अंतर नहीं है।