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मन्नत पूरी करने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Updated Fri, 15 Jun 2018 09:59 PM IST
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मन्नत पूरी करने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
आषाढ़ संक्रांति को धार्मिक स्थल सरयोलसर में लगा मेला
काफी संख्या में पर्यटकों ने किए माता के बूढ़ी नागिन के दीदार
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सरयोलसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आषाढ़ संक्रांति के मेले के लिए कई श्रद्धालु एक दिन पहले ही माता की वास स्थली में पहुंचे थे। माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से आए भक्तों ने शुक्रवार सुबह पौ फटते ही पूजा पाठ के साथ देसी घी का चढ़ावा चढ़ाया और माता बूढ़ी नागिन को रखी मन्नत को घी की धार से पूरा किया। इस मौके पर देशी-विदेशी सैलानियों ने भी माता का दीदार किया।
घाटी के रघुपुर, कराड़, जांजा, आनी, बंजार, करसोग, निरमंड, कुल्लू तथा कुमारसेन आदि जगहों के लोगों में माता बूढ़ी नागिन के प्रति गहरी आस्था है और हर साल आषाढ़ संक्रांति को यहां उत्सव जैसा माहौल रहता है। करीब एक किलोमीटर की परिधि में फैली माता की पवित्र झील सरयोलसर के चारों ओर सुख-शांति व समृद्धि के लिए घी की फेरी दी गई। इस पावन अवसर पर पिकनिक बनाने के लिए सरकारी व निजी स्कूलों के तथा कालेजों के विद्यार्थी भी पहुंचे हुए थे। भारी भीड़ के चलते 10280 फुट ऊंचे पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रा में वाहनों को पार्क करने के लिए भी जगह नहीं मिल पाई और बार-बार जाम लगने से श्रद्धालुओं, सैलानियों तथा आम लोगों को भी परेशान होना पड़ा। इस संबंध मेें कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता के भक्तों ने घी की धार से फेरी लगाते हुए अपनी मनोकामना पूर्ण की। आषाढ़ मेले के लिए यहां दो दिनों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था।
लोगों ने किया आषाढ़ संक्रांति का स्नान
हालांकि माता बूढ़ी नागिन की सरयोलसर झील की पवित्रता, स्वच्छता और सुरक्षा को देखते हुए झील में डुबकी लगाना करीब एक दशक से बंद है। बावजूद लोगों ने बाल्टी और अन्य बर्तन से पानी निकाल कर झील से बाहर स्नान कर पुण्य कमाया है। माता की झील के पानी से स्नान करने पर कई चर्म रोग दूर होते हैं।
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आषाढ़ संक्रांति को धार्मिक स्थल सरयोलसर में लगा मेला
काफी संख्या में पर्यटकों ने किए माता के बूढ़ी नागिन के दीदार
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सरयोलसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आषाढ़ संक्रांति के मेले के लिए कई श्रद्धालु एक दिन पहले ही माता की वास स्थली में पहुंचे थे। माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से आए भक्तों ने शुक्रवार सुबह पौ फटते ही पूजा पाठ के साथ देसी घी का चढ़ावा चढ़ाया और माता बूढ़ी नागिन को रखी मन्नत को घी की धार से पूरा किया। इस मौके पर देशी-विदेशी सैलानियों ने भी माता का दीदार किया।
घाटी के रघुपुर, कराड़, जांजा, आनी, बंजार, करसोग, निरमंड, कुल्लू तथा कुमारसेन आदि जगहों के लोगों में माता बूढ़ी नागिन के प्रति गहरी आस्था है और हर साल आषाढ़ संक्रांति को यहां उत्सव जैसा माहौल रहता है। करीब एक किलोमीटर की परिधि में फैली माता की पवित्र झील सरयोलसर के चारों ओर सुख-शांति व समृद्धि के लिए घी की फेरी दी गई। इस पावन अवसर पर पिकनिक बनाने के लिए सरकारी व निजी स्कूलों के तथा कालेजों के विद्यार्थी भी पहुंचे हुए थे। भारी भीड़ के चलते 10280 फुट ऊंचे पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रा में वाहनों को पार्क करने के लिए भी जगह नहीं मिल पाई और बार-बार जाम लगने से श्रद्धालुओं, सैलानियों तथा आम लोगों को भी परेशान होना पड़ा। इस संबंध मेें कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता के भक्तों ने घी की धार से फेरी लगाते हुए अपनी मनोकामना पूर्ण की। आषाढ़ मेले के लिए यहां दो दिनों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था।
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लोगों ने किया आषाढ़ संक्रांति का स्नान
हालांकि माता बूढ़ी नागिन की सरयोलसर झील की पवित्रता, स्वच्छता और सुरक्षा को देखते हुए झील में डुबकी लगाना करीब एक दशक से बंद है। बावजूद लोगों ने बाल्टी और अन्य बर्तन से पानी निकाल कर झील से बाहर स्नान कर पुण्य कमाया है। माता की झील के पानी से स्नान करने पर कई चर्म रोग दूर होते हैं।
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