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तंबुओं में फसल का पहरा करने को मजबूर
Updated Sun, 04 Feb 2018 09:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। आवारा पशुओं के उत्पात से कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों की फसल बर्बाद हो रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में घाटी में बीजी गई फसल लावारिस पशु तबाह कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सड़क के साथ लगते खेतों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। किसान तंबुओं में डेरा डाला कर सर्द रातों में अपनी फसल का पहरा देने को मजबूर हैं। लावारिस पशुओं की संख्या अधिक होने से फसलें सुरक्षित नहीं हैं। रात के समय पशुओं के झुंड खेतों में घुस कर फसलों को तबाह कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा हैं। घाटी वासी चमन, अमन, राकेश, अनिश, देवेंद्र, अनूप भंडारी, जय चंद, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर, मोहर सिंह, देवराज, सतीश ठाकुर, सुशील और अशोक का कहना है कि रामशिला गेमन पुल से जिया तक दर्जनों लावारिस पशु सड़क किनारे घूमते रहते हैं। रात के समय आसपास के खेतों का रुख कर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये पशु छोटे-छोटे सेब सहित अन्य फलों के पौध को भी खाकर तहस-नहस कर रहे हैं। खराहल के न्योली, बराधा, थरमाण, सेउबाग और घराकड़ इलाकों में लावारिस पशु फसल को नष्ट कर रहे हैं। कई किसानों ने तो फसल बीजनी ही बंद कर दी है। कृषि विकास संघ के उपप्रधान जय चंद तथा सचिव एसी ठाकुर, गांव सुघार कमेटी थरमाण के प्रधान अनूप भंडारी ने पंचायत के नुमाइंदों और प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द निदान किया जाए।
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खराहल (कुल्लू)। आवारा पशुओं के उत्पात से कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों की फसल बर्बाद हो रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में घाटी में बीजी गई फसल लावारिस पशु तबाह कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सड़क के साथ लगते खेतों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। किसान तंबुओं में डेरा डाला कर सर्द रातों में अपनी फसल का पहरा देने को मजबूर हैं। लावारिस पशुओं की संख्या अधिक होने से फसलें सुरक्षित नहीं हैं। रात के समय पशुओं के झुंड खेतों में घुस कर फसलों को तबाह कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा हैं। घाटी वासी चमन, अमन, राकेश, अनिश, देवेंद्र, अनूप भंडारी, जय चंद, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर, मोहर सिंह, देवराज, सतीश ठाकुर, सुशील और अशोक का कहना है कि रामशिला गेमन पुल से जिया तक दर्जनों लावारिस पशु सड़क किनारे घूमते रहते हैं। रात के समय आसपास के खेतों का रुख कर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये पशु छोटे-छोटे सेब सहित अन्य फलों के पौध को भी खाकर तहस-नहस कर रहे हैं। खराहल के न्योली, बराधा, थरमाण, सेउबाग और घराकड़ इलाकों में लावारिस पशु फसल को नष्ट कर रहे हैं। कई किसानों ने तो फसल बीजनी ही बंद कर दी है। कृषि विकास संघ के उपप्रधान जय चंद तथा सचिव एसी ठाकुर, गांव सुघार कमेटी थरमाण के प्रधान अनूप भंडारी ने पंचायत के नुमाइंदों और प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द निदान किया जाए।