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Kangra News: तटीकरण के लिए छलनी कर दिया मांझी खड्ड का सीना

Mon, 20 Apr 2026 08:04 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 08:04 AM IST
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The chest of Manjhi Khad was sieved for embankment
धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्
धर्मशाला। मांझी खड्ड में सुरक्षा के नाम पर चल रहे तटीकरण का कार्य से भटेहड़ से पासू तक खड्ड के प्राकृतिक स्वरूप को बुरी तरह तहस-नहस किया जा रहा है। खड्ड में उतरी पोकलेन मशीनें उन विशाल पत्थरों को तोड़ रही हैं, जो प्राकृतिक रूप से पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करते है। इन पत्थरों का इस्तेमाल क्रेटवॉल (तार के जालों में पत्थर) बनाने के लिए किया जा रहा है।
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विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने इस पूरी प्रक्रिया को अवैज्ञानिक करार देते हुए इसे तटीकरण के नाम पर सरकारी खनन और भविष्य के लिए बड़ा खतरा बताया है। उनका आरोप है कि खड्ड से पत्थर हटाने से इसका तल समतल हो गया है। इससे आने वाले मानसून में पानी का बहाव अनियंत्रित होकर चैतड़ू और आसपास के गांवों में 2021 जैसी भीषण बाढ़ ला सकता है।
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गुणवत्ता पर भी उठे सवाल : बनने से पहले ही दरकने लगीं दीवारें

खड्ड के तटीकरण का कार्य जनवरी 2025 में शुरू हुआ था। अब शीला और पासू जैसे क्षेत्रों में अभी क्रेटवॉल बन ही रही है, वहां की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। पत्थरों को अवैज्ञानिक तरीके से तोड़ने के कारण खड़्ड का तल गहरा हो गया है। इससे नवनिर्मित दीवारों की नींव भी कमजोर हो गई है। हाल में हुई बारिश ने ही निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल कर रखी दी है। लोगों में दहशत है कि यह दीवारें बरसात में पानी के पहले ही तेज बहाव को नहीं झेल पाएंगी।
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भूवैज्ञानी की चेतावनी को किया जा रहा दरकिनार

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अंबरीश महाजन ने इस कार्य को भविष्य के लिए विनाशकारी करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से खड्ड के पत्थरों को तोड़ा जा रहा है, वह पूरी तरह अवैज्ञानिक है। यह प्रक्रिया खड्ड के प्राकृतिक इकोसिस्टम को खत्म कर रही है। इसका खामियाजा भारी बारिश के बाद चैतड़ू सहित आसपास के क्षेत्रों को भारी तबाही के रूप में भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार इस खतरे के प्रति चेताया गया, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।



लोग बोले- विजिलेंस जांच हो, खर्च हो रहे 10 करोड़

स्थानीय ग्रामीणों जोगिंद्र कुमार, बृज मोहन, विशाल, सरूप कुमार और विकास सहित कई अन्यों ने कहा कि जब तटीकरण के लिए मुख्य सामग्री (पत्थर) खड्ड से ही मुफ्त में ली जा रही है, तो सरकार द्वारा स्वीकृत 10 करोड़ रुपये का बजट कहां खर्च हो रहा है। क्या सारा पैसा केवल तार, लेबर और मशीनों के किराए पर ही खत्म किया जा रहा है। ग्रामीणों ने एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए मामले की विजिलेंस जांच मांग उठाई है।

मांझी खड्ड के तटीकरण का कार्य पूरी तरह से खनन विभाग की रेखरेख में किया जा रहा है। कार्य को शुरू करने से पहले वैज्ञानिकों की राय ली गई है। उसी के अनुरूप कार्य हो रहा है। -सुमित कटोच, अधिशाषी अभियंता, जल शक्ति विभाग, मंडल धर्मशाला


जल शक्ति विभाग मांझी खड्ड के तटीकरण का कार्य करवा रहा है। अगर लोगों को कार्य प्रणाली से कोई आपत्ति है तो वे इसकी लिखित शिकायत करें। शिकायत के आधार पर ही मौके की जांच की जाएगी। -शैलजा चौधरी, खनन अधिकारी, कांगड़ा

धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्

धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्

धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्

धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्

धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्

धर्मशाला के भटेहड़ में मांझी खड्ड में तटीकरण के चलते किया जा रहे क्रेट वॉल के कारण खाली हुई खड्

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