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Kangra News: विशेषज्ञों की कमी से रेफरल बना नूरपुर अस्पताल
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खास खबर
34 में से 15 चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच भी प्रभावित
गर्भवती महिलाओं समेत मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर
सचिन चौधरी
धर्मशाला। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के दावों के बीच सिविल अस्पताल नूरपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। लंबे समय से चिकित्सकों के 34 स्वीकृत पदों में से 15 खाली चल रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल में उपचार के बजाय मरीजों को रेफर करने की स्थिति अधिक बन रही है।
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से अल्ट्रासाउंड और विभिन्न जांच सुविधाएं प्रभावित हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं समेत पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण खून, पेशाब, थूक, ऊतक और अन्य नमूनों की जांच भी प्रभावित हो रही है। जांच रिपोर्ट के लिए भी मरीजों को अन्य स्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अस्पताल में नेत्र रोग और त्वचा रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं हैं। बरसात के मौसम में फंगल संक्रमण के मरीजों की परेशानी इससे और बढ़ गई है।
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वर्तमान में स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को भी जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ न होने से वायरल समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों के परिजनों को भी निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जाना पड़ रहा है।
अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा अधिकारियों की कमी का असर विभिन्न ओपीडी पर भी पड़ रहा है। नूरपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने के कारण गंभीर और विशेषज्ञ परामर्श वाले मरीजों को बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
कोट्स...
पहले अस्पताल में चिकित्सकों के 17 पद खाली थे, लेकिन हालही में सरकारी की ओर से पांच चिकित्सकों के ऑर्डर हुए हैं, जिसमें से अभी दो विशेषज्ञों में ज्वाइन किया है। चिकित्सकों की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवाया गया है। - डॉ. अनुपमा, एमएस, सिविल अस्पताल नूरपुर
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34 में से 15 चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच भी प्रभावित
गर्भवती महिलाओं समेत मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर
सचिन चौधरी
धर्मशाला। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के दावों के बीच सिविल अस्पताल नूरपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। लंबे समय से चिकित्सकों के 34 स्वीकृत पदों में से 15 खाली चल रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल में उपचार के बजाय मरीजों को रेफर करने की स्थिति अधिक बन रही है।
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से अल्ट्रासाउंड और विभिन्न जांच सुविधाएं प्रभावित हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं समेत पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
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पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण खून, पेशाब, थूक, ऊतक और अन्य नमूनों की जांच भी प्रभावित हो रही है। जांच रिपोर्ट के लिए भी मरीजों को अन्य स्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अस्पताल में नेत्र रोग और त्वचा रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं हैं। बरसात के मौसम में फंगल संक्रमण के मरीजों की परेशानी इससे और बढ़ गई है।
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वर्तमान में स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को भी जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ न होने से वायरल समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों के परिजनों को भी निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जाना पड़ रहा है।
अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा अधिकारियों की कमी का असर विभिन्न ओपीडी पर भी पड़ रहा है। नूरपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने के कारण गंभीर और विशेषज्ञ परामर्श वाले मरीजों को बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
कोट्स...
पहले अस्पताल में चिकित्सकों के 17 पद खाली थे, लेकिन हालही में सरकारी की ओर से पांच चिकित्सकों के ऑर्डर हुए हैं, जिसमें से अभी दो विशेषज्ञों में ज्वाइन किया है। चिकित्सकों की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवाया गया है। - डॉ. अनुपमा, एमएस, सिविल अस्पताल नूरपुर