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पर्यावरण संरक्षण बिना मानव जीवन का अस्तित्व संभव नहीं : डॉ. प्रशांत
Wed, 29 Apr 2026 08:31 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 29 Apr 2026 08:31 AM IST
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डमटाल (कांगड़ा)। पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के बिना मानव जीवन की निरंतरता और अस्तित्व संभव नहीं है। यह बात मिनर्वा पीजी कॉलेज चंगरारा में ‘सतत ग्रह : 21वीं सदी की संभावनाएं और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य वक्ता डॉ. प्रशांत कुमार ने कही।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों को 2030 तक पूरा करने के लिए सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया। कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष इंजीनियर जरनैल सिंह पटियाल ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल शैक्षणिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत ग्रह के निर्माण की दिशा में एक ठोस पहल करना है। उन्होंने युवाओं और शोधकर्ताओं से पृथ्वी के संरक्षण हेतु मिलकर कार्य करने की अपील की।
विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। डॉ. आदर्श पाल विग ने शहरी समस्याओं के समाधान हेतु पारंपरिक ज्ञान की आवश्यकता बताई। डॉ. एचएस बन्याल ने उत्तर-पश्चिमी हिमालय की मछली विविधता और डॉ. पवन राणा ने वनों को कीटों से बचाने की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया। डॉ. भग चंद चौहान ने सतत विकास के प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
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मेधावी शोधकर्ता हुए सम्मानित
सम्मेलन के दौरान आईआईटी जम्मू के नीरज सोनी को बेस्ट यंग रिसर्चर अवार्ड से नवाजा गया। ओरल प्रेजेंटेशन में आईसीएआर पालमपुर की डॉ. रिंकू शर्मा प्रथम रहीं, जबकि पोस्टर प्रेजेंटेशन में अस्मी चोपड़ा ने बाजी मारी। इस अवसर पर देश भर से आए शोधकर्ताओं ने पर्यावरण चुनौतियों पर अपने निष्कर्ष साझा किए।
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उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों को 2030 तक पूरा करने के लिए सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया। कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष इंजीनियर जरनैल सिंह पटियाल ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल शैक्षणिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत ग्रह के निर्माण की दिशा में एक ठोस पहल करना है। उन्होंने युवाओं और शोधकर्ताओं से पृथ्वी के संरक्षण हेतु मिलकर कार्य करने की अपील की।
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विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। डॉ. आदर्श पाल विग ने शहरी समस्याओं के समाधान हेतु पारंपरिक ज्ञान की आवश्यकता बताई। डॉ. एचएस बन्याल ने उत्तर-पश्चिमी हिमालय की मछली विविधता और डॉ. पवन राणा ने वनों को कीटों से बचाने की रणनीतियों पर व्याख्यान दिया। डॉ. भग चंद चौहान ने सतत विकास के प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
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मेधावी शोधकर्ता हुए सम्मानित
सम्मेलन के दौरान आईआईटी जम्मू के नीरज सोनी को बेस्ट यंग रिसर्चर अवार्ड से नवाजा गया। ओरल प्रेजेंटेशन में आईसीएआर पालमपुर की डॉ. रिंकू शर्मा प्रथम रहीं, जबकि पोस्टर प्रेजेंटेशन में अस्मी चोपड़ा ने बाजी मारी। इस अवसर पर देश भर से आए शोधकर्ताओं ने पर्यावरण चुनौतियों पर अपने निष्कर्ष साझा किए।