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Kangra News: जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहा दिव्यांग फौजी
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धर्मशाला। सरकार की ओर से आवंटित जमीन पर कब्जे के लिए एक दिव्यांग फौजी पिछले चार साल से दर-बदर भटक रहा है। पटवारी, तहसील, एसडीएम से लेकर जिलाधीश के कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी संबंधित भूमि पर राजस्व विभाग कब्जा नहीं दिला पाया है।
13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना का ऑपरेशन पराक्रम शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री के आदेश पर पाकिस्तान सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई थी। इस ऑपरेशन में कई जवान बलिदान हो गए थे और कई सैनिक वार डिसेबल्ड (विकलांग युद्ध दिग्गज) की श्रेणी में शामिल हुए।
पालमपुर नगर निगम के वार्ड नंबर छह खिलडू-बिंद्रावनी वार्ड के निवासी नायब सूबेदार जेएन ठाकुर ने संसद पर आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में हिस्सा लिया था और अपनी दायीं टांग गंवा दी थी। उन्होंने सेना के विकलांग युद्ध दिग्गज कोटे से घर के नजदीक अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए कांगड़ा जिला प्रशासन के समक्ष डेढ़ मरले जमीन के लिए आवेदन किया था।
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कांगड़ा जिला प्रशासन द्वारा उन्हें 2019-20 में खिलड़ू गांव में डेढ़ मरला जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम पर दर्ज है। लेकिन अब तक जमीन का कब्जा नहीं मिल सका है। अब वह न्याय की गुहार लेकर करीब 40 किलोमीटर दूरी पालमपुर से चलकर धर्मशाला स्थित उपायुक्त कांगड़ा के दरबार में पहुंचे हैं।
उधर, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने उन्हें जल्द जमीन का कब्जा दिलवाने का आश्वासन देते हुए इस संदर्भ में एसडीएम पालमपुर को निर्देश जारी किए हैं।
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13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना का ऑपरेशन पराक्रम शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री के आदेश पर पाकिस्तान सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई थी। इस ऑपरेशन में कई जवान बलिदान हो गए थे और कई सैनिक वार डिसेबल्ड (विकलांग युद्ध दिग्गज) की श्रेणी में शामिल हुए।
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पालमपुर नगर निगम के वार्ड नंबर छह खिलडू-बिंद्रावनी वार्ड के निवासी नायब सूबेदार जेएन ठाकुर ने संसद पर आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में हिस्सा लिया था और अपनी दायीं टांग गंवा दी थी। उन्होंने सेना के विकलांग युद्ध दिग्गज कोटे से घर के नजदीक अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए कांगड़ा जिला प्रशासन के समक्ष डेढ़ मरले जमीन के लिए आवेदन किया था।
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कांगड़ा जिला प्रशासन द्वारा उन्हें 2019-20 में खिलड़ू गांव में डेढ़ मरला जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम पर दर्ज है। लेकिन अब तक जमीन का कब्जा नहीं मिल सका है। अब वह न्याय की गुहार लेकर करीब 40 किलोमीटर दूरी पालमपुर से चलकर धर्मशाला स्थित उपायुक्त कांगड़ा के दरबार में पहुंचे हैं।
उधर, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने उन्हें जल्द जमीन का कब्जा दिलवाने का आश्वासन देते हुए इस संदर्भ में एसडीएम पालमपुर को निर्देश जारी किए हैं।