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सहकारिता ने बढ़ाई किसानों-बागवानों की आय : रांगड़ा
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:38 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
परागपुर (कांगड़ा)। गांव के विकास के बिना देश के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अब वह समय दूर नहीं है, जब शहरों से गांव की ओर पलायन शुरू हो जाएगा। यह बात 64वें अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह पर राज्य स्तरीय सहकारी कार्यशाला में सहायक पंजीयक सुरेश कुमार रांगड़ा ने रविवार को सचिव सहकारी शिक्षण संस्थान गरली में कही।
सहकारिता विश्वास का एक गठबंधन है, जो कि विश्वास पर आधारित है। इस विश्वास के डगमगाने से सहकारिता आंदोलन कमजोर होता है। संसार में जापान, कोरिया, चीन के किसान-बागवान और मजदूर संसार भर में सबसे अमीर हैं। सहकार से ही उनकी समृद्धि का मार्ग खुला है। इसी तरह भारतवर्ष में गुजरात, केरल और महाराष्ट्र का किसान-बागवान भी सहकार के कारण ही अमीर हुआ है, तो हिमाचल में लाहौल आलू उत्पादक समिति से जुड़े किसान-बागवान मजदूर भी अपनी समृद्धि की गाथा सहकार के माध्यम से ही लिख रहे हैं। वर्तमान में देश भर में पांच लाख और हिमाचल में पांच हजार सहकारी समितियां कार्य कर रही हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि अगर इन सहकारी समितियों ने अपनी कार्यप्रणाली में समय के अनुरूप परिवर्तन नहीं किया तो सहकारी आंदोलन कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऊना का विधि कॉलेज सहकारी आधार पर चलाया जा रहा है। ऊना, चंबा में सहकारी आधार पर करोड़ों रुपये की परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। उन्होंने दूध, सब्जी के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही है। सहकारी समितियों को इसे चैलेंज के रूप में लेकर योजनाएं बनानी होंगी। इस अवसर पर स्थानीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गरली की छात्राओं ने सहकारिता गान और पंजाबी गिद्दा भी प्रस्तुत किया। हिमकोफैड के चेयरमैन दविंद्र ठाकुर ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले स्थानीय स्कूल, लिटल फ्लावर स्कूल और दिल्ली कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को सम्मानित किया। इस मौके पर सुधीर कटोच, वीरेंद्र धर्माणी, विजय शर्मा, प्रिंसिपल अनिरुद्ध शर्मा, एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी श्याम शर्मा, अनिता राणा, चारुलता, दीपक धीमान, पवन लवाना, ग्रुप लीडर सुमित और हर्ष आदि मौजूद रहे।
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परागपुर (कांगड़ा)। गांव के विकास के बिना देश के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अब वह समय दूर नहीं है, जब शहरों से गांव की ओर पलायन शुरू हो जाएगा। यह बात 64वें अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह पर राज्य स्तरीय सहकारी कार्यशाला में सहायक पंजीयक सुरेश कुमार रांगड़ा ने रविवार को सचिव सहकारी शिक्षण संस्थान गरली में कही।
सहकारिता विश्वास का एक गठबंधन है, जो कि विश्वास पर आधारित है। इस विश्वास के डगमगाने से सहकारिता आंदोलन कमजोर होता है। संसार में जापान, कोरिया, चीन के किसान-बागवान और मजदूर संसार भर में सबसे अमीर हैं। सहकार से ही उनकी समृद्धि का मार्ग खुला है। इसी तरह भारतवर्ष में गुजरात, केरल और महाराष्ट्र का किसान-बागवान भी सहकार के कारण ही अमीर हुआ है, तो हिमाचल में लाहौल आलू उत्पादक समिति से जुड़े किसान-बागवान मजदूर भी अपनी समृद्धि की गाथा सहकार के माध्यम से ही लिख रहे हैं। वर्तमान में देश भर में पांच लाख और हिमाचल में पांच हजार सहकारी समितियां कार्य कर रही हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि अगर इन सहकारी समितियों ने अपनी कार्यप्रणाली में समय के अनुरूप परिवर्तन नहीं किया तो सहकारी आंदोलन कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऊना का विधि कॉलेज सहकारी आधार पर चलाया जा रहा है। ऊना, चंबा में सहकारी आधार पर करोड़ों रुपये की परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। उन्होंने दूध, सब्जी के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही है। सहकारी समितियों को इसे चैलेंज के रूप में लेकर योजनाएं बनानी होंगी। इस अवसर पर स्थानीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गरली की छात्राओं ने सहकारिता गान और पंजाबी गिद्दा भी प्रस्तुत किया। हिमकोफैड के चेयरमैन दविंद्र ठाकुर ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले स्थानीय स्कूल, लिटल फ्लावर स्कूल और दिल्ली कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को सम्मानित किया। इस मौके पर सुधीर कटोच, वीरेंद्र धर्माणी, विजय शर्मा, प्रिंसिपल अनिरुद्ध शर्मा, एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी श्याम शर्मा, अनिता राणा, चारुलता, दीपक धीमान, पवन लवाना, ग्रुप लीडर सुमित और हर्ष आदि मौजूद रहे।
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