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मांगें न मानीं तो विधानसभा का घेराव करेंगे पीसमील वर्कर
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मांगें न मानीं तो विधानसभा का
घेराव करेंगे पीस मील वर्कर
48 घंटे तक टूल डाउन हड़ताल की भी दी चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रदेश भर में हिमाचल पथ परिवहन निगम की कार्यशालाओं में तैनात पीस मील वर्कर मांगें पूरी न होने पर विधानसभा का घेराव करेंगे। इसके अलावा वे इस दौरान 48 घंटे की टूल डाउन हड़ताल भी कर सकते हैं। यह चेतावनी धर्मशाला से पीस मील वर्कर यूनियन के प्रधान संजीव कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि कर्मशालाओं में कार्यरत पीस मील कर्मचारी सात से आठ घंटे तक विभिन्न ट्रेड़ों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें इसकी एवज में नाममात्र वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार में तैनात अन्य कर्मचारियों को तीन साल के बाद अनुबंध में लिया जा रहा है, लेकिन उनके लिए आज दिन तक कोई नीति नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि पीस मील वर्करों ने सरकार के समक्ष कई बार अपनी समस्या को रखा, लेकिन आज दिन तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। कई पीसमील वर्कर आईटीआई पास हैं, बावजूद इसके उनका शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर परिवहन मंत्री, निगम के वाइस चेयरमैन विजय अग्निहोत्री, एमडी संदीप भटनागर से भी मिले, लेकिन आश्वासनों के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि विभिन्न वर्कशॉपों में अब 15 प्रतिशत ही नियमित कर्मचारी बचे हैं, जबकि 27 डिपुओं का काम इन्हीं पीस मील वर्करों के सिर पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनके शीघ्र ही कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई तो वे विधानसभा का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। साथ ही इस दौरान टूल डाउन हड़ताल भी शुरू कर देंगे।
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घेराव करेंगे पीस मील वर्कर
48 घंटे तक टूल डाउन हड़ताल की भी दी चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रदेश भर में हिमाचल पथ परिवहन निगम की कार्यशालाओं में तैनात पीस मील वर्कर मांगें पूरी न होने पर विधानसभा का घेराव करेंगे। इसके अलावा वे इस दौरान 48 घंटे की टूल डाउन हड़ताल भी कर सकते हैं। यह चेतावनी धर्मशाला से पीस मील वर्कर यूनियन के प्रधान संजीव कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि कर्मशालाओं में कार्यरत पीस मील कर्मचारी सात से आठ घंटे तक विभिन्न ट्रेड़ों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें इसकी एवज में नाममात्र वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार में तैनात अन्य कर्मचारियों को तीन साल के बाद अनुबंध में लिया जा रहा है, लेकिन उनके लिए आज दिन तक कोई नीति नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि पीस मील वर्करों ने सरकार के समक्ष कई बार अपनी समस्या को रखा, लेकिन आज दिन तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। कई पीसमील वर्कर आईटीआई पास हैं, बावजूद इसके उनका शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर परिवहन मंत्री, निगम के वाइस चेयरमैन विजय अग्निहोत्री, एमडी संदीप भटनागर से भी मिले, लेकिन आश्वासनों के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि विभिन्न वर्कशॉपों में अब 15 प्रतिशत ही नियमित कर्मचारी बचे हैं, जबकि 27 डिपुओं का काम इन्हीं पीस मील वर्करों के सिर पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनके शीघ्र ही कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई तो वे विधानसभा का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। साथ ही इस दौरान टूल डाउन हड़ताल भी शुरू कर देंगे।