GST 2.0: जीएसटी कटौती से 40 से 50 रुपये तक सस्ता होगा सीमेंट, हिमाचल प्रदेश में पंजाब से महंगे हैं दाम
हिमाचल प्रदेश में जीएसटी की नई दरें लागू होने से 40 से 50 रुपये तक सीमेंट के दाम कम होने की संभावना है। बता दें कि प्रदेश में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां होने के बावजूद यहां उपभोक्ताओं को पंजाब और अन्य राज्यों से महंगा सीमेंट खरीदना पड़ता है। पढ़ें पूरी खबर...
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जीएसटी परिषद ने दिवाली से पहले बड़ा फैसला लेते हुए सीमेंट पर टैक्स को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से पूरे देश के साथ हिमाचल के लोगों को भी राहत मिलेगी। प्रदेश में नई दरें लागू होने से 40 से 50 रुपये तक सीमेंट के दाम कम होने की संभावना है।
प्रदेश में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां होने के बावजूद यहां उपभोक्ताओं को पंजाब और अन्य राज्यों से महंगा सीमेंट खरीदना पड़ता है। पिछले दो साल की बात करें तो सीमेंट के दामों में करीब 80 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। अब टैक्स कटौती से अब प्रति बैग 40 से 50 रुपये तक की राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में फिलहाल एसीसी का साधारण सीमेंट 425 से 435 रुपये और गोल्ड 475 से 485 रुपये प्रति बैग बिक रहा है। अल्ट्राटेक का साधारण सीमेंट 420 रुपये और गोल्ड 470 रुपये, जबकि अंबुजा का साधारण 430 रुपये और गोल्ड 480 रुपये प्रति बैग है। नई दरों के लागू होने के बाद दामों में औसतन 10 फीसदी की कमी आएगी। यानी एसीसी का साधारण सीमेंट 382 से 392 रुपये और गोल्ड 427 से 437 रुपये तक आ सकता है। इसी तरह अल्ट्राटेक का साधारण 378 और गोल्ड 423 रुपये जबकि अंबुजा का साधारण 387 और गोल्ड 432 रुपये तक मिलने की संभावना है।
निर्माण की लागत में सीमेंट की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है। जीएसटी दरों में यह कटौती मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए घर बनाना आसान बनाएगी। खासकर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में जहां परिवहन लागत अधिक है, वहां उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा। सीमेंट के अलावा परिषद ने अन्य निर्माण सामग्रियों पर भी दरें घटाई हैं। संगमरमर और ट्रैवर्टीन ब्लॉकों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। ग्रेनाइट ब्लॉकों पर भी 12 फीसदी की जगह अब 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। रेत-चूने की ईंटें और पत्थर की जड़ाई पर भी टैक्स 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। इन बदलावों से घर बनाने वालों को और राहत मिलेगी। सस्ता सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री मिलने से प्रदेश में निजी निर्माण कार्यों की लागत घटेगी।