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Himachal News: विभागीय जांच कमेटियां बनाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे सात जिलों के अफसर, चेतावनी पत्र जारी

Tue, 06 Jan 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 06 Jan 2026 06:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में विभागीय जांच कमेटियां गठित करने के लिए मांगी गई जानकारी समय पर न भेजने पर सात जिलों के उपनिदेशकों को शिक्षा निदेशक ने चेतावनी पत्र जारी किया है। जानें विस्तार से...

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Himachal Officials in seven districts are showing no interest in forming departmental inquiry committees
शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उच्च शिक्षा विभाग में वर्षों से लंबित विभागीय जांचों के निपटारे को लेकर अब सख्ती शुरू हो गई है। विभागीय जांच कमेटियां गठित करने के लिए मांगी गई जानकारी समय पर न भेजने पर सात जिलों के उपनिदेशकों को शिक्षा निदेशक ने चेतावनी पत्र जारी किया है। इन जिलों में ऊना, लाहौल-स्पीति, बिलासपुर, किन्नौर, कुल्लू, कांगड़ा और मंडी शामिल हैं।

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उच्च शिक्षा निदेशालय ने लंबित जांचों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए फील्ड स्तर से अनुभवी अधिकारियों के नाम मांगे थे, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी इन जिलों से रिकॉर्ड नहीं पहुंच पाया। इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए निदेशक ने स्पष्ट किया है कि यदि अब भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो मामला गंभीरता से लिया जाएगा।

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उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार ने बताया कि विभाग में कई मामलों में जांच रिपोर्टें दो से तीन साल तक लंबित रहती हैं। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि अनुशासनात्मक कार्रवाई भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए विभाग ने जांच अधिकारियों का एक विशेष और स्थायी पूल बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी जिला उच्च शिक्षा उपनिदेशकों से अपने-अपने जिलों से कम से कम 10 प्रिंसिपल और 10 अधीक्षक ग्रेड-दो के नाम भेजने को कहा गया है। चयनित अधिकारियों के पास न्यूनतम पांच वर्ष की नियमित सेवा होनी चाहिए और वे निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले न हों, ताकि लंबे समय तक उनसे जांच कार्य लिया जा सके।

चयनित अधिकारियों को शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (हिप्पा) में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विभागीय जांच प्रक्रिया, अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम, साक्ष्य संकलन, गवाहों के बयान, चार्जशीट तैयार करना और अंतिम जांच रिपोर्ट लेखन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। निदेशक ने कहा कि कई बार जांच अधिकारी अनुभव की कमी या अतिरिक्त कार्यभार के चलते जांच प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं कर पाते। इससे संबंधित कर्मचारी वर्षों तक अनिश्चितता की स्थिति में रहते हैं और विभागीय छवि भी प्रभावित होती है।

प्रशिक्षित जांच अधिकारियों की उपलब्धता से न केवल जांच प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि निर्णय भी समयबद्ध और पारदर्शी होंगे। निदेशालय ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों से वांछित जानकारी 10 दिनों के भीतर भेजी जाए। सात जिलों द्वारा अब तक नाम न भेजे जाने को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी पत्र जारी कर दिया गया है। शिक्षा निदेशक ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्देशों की अनदेखी जारी रही तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।

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