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हिमाचल शिक्षा निदेशालय के निर्देश: स्कूलों में स्वास्थ्य जांच के दिन अब 100 फीसदी हाजिरी जरूरी

Thu, 08 Oct 2026 10:36 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 08 Oct 2026 10:36 PM IST
सार

प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वास्थ्य जांच शिविरों के दौरान नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के प्रत्येक विद्यार्थी की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। 

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Himachal Education Directorate: 100% attendance now mandatory in schools on health check-up days
हिमाचल स्कूल शिक्षा निदेशालय। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच और पोषण कार्यक्रमों को लेकर शिक्षा निदेशालय ने बड़ा अभियान शुरू किया है। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वास्थ्य जांच शिविरों के दौरान नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के प्रत्येक विद्यार्थी की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य परीक्षण, आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) गोलियों और कृमिनाशक दवाओं के वितरण में कोई भी छात्र छूटना नहीं चाहिए। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला उपनिदेशकों को जारी पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण को शत-प्रतिशत कवरेज के साथ पूरा करना राज्य सरकार और केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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कई बार स्वास्थ्य शिविरों के दौरान विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारण बड़ी संख्या में बच्चे जांच और दवा वितरण से वंचित रह जाते हैं।  इसे देखते हुए सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वास्थ्य शिविर अथवा अभियान के दिन विद्यार्थियों की अधिकतम नहीं बल्कि 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए स्कूल प्रशासन को अभिभावकों से भी समन्वय स्थापित करना होगा। निदेशालय ने जिलों को निर्देश दिया है कि पूरे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाए। स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, कवरेज और विद्यार्थियों को दी गई सेवाओं की जानकारी हर महीने निदेशालय को भेजी जाए।

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एनीमिया और कुपोषण पर रहेगा फोकस
शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच से विद्यार्थियों में एनीमिया, कुपोषण, दृष्टि दोष, दंत रोग, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सकती है। इसके अलावा आयरन-फोलिक एसिड की नियमित खुराक और कृमिनाशक दवाओं के वितरण से बच्चों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

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