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Himachal Budget: धर्मशाला में सब्जी की दुकान करने वाली अमरजोत जिसका बजट भाषण में सीएम ने किया जिक्र; जानें
Tue, 18 Mar 2025 10:31 AM IST
अंकेश डोगरा
मोहिंद्र सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
मोहिंद्र सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Tue, 18 Mar 2025 10:31 AM IST
सार
मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना के बारे में बताते हुए बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि उन्हें धर्मशाला दौरे के दौरान कचहरी बाजार में मिली दुकानदार बेटी से यह योजना लाने का विचार आया था।
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धर्मशाला के कचहरी अड्डा में सब्जी की दुकान करती अमरजोत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना में लचीलापन लाने और योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करने पर धर्मशाला में सब्जी की दुकान करने वाली बेटी अमरजोत ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपना वादा निभाया है और छोटे-छोटे दुकानदारों और रेहड़ी पर अपनी आजीविका कमाने वाले लोगों के बारे में एक अच्छा कदम उठाया है, जो कि इन लोगों के जीवन में एक नया रंग भर देगा।
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शिमला में बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि उन्हें धर्मशाला दौरे के दौरान कचहरी बाजार में मिली दुकानदार बेटी से यह योजना लाने का विचार आया था। कचहरी अड्डा के हनुमान मंदिर के साथ सब्जी की दुकान करने वाली अमरजोत ने कहा कि शीतकालीन प्रवास के दौर मुख्यमंत्री जब धर्मशाला के कचहरी अड्डा में घूम रहे थे तो वह भी वहां पर एक रेहड़ी पर मूंगफली खरीद रही थी। ऐसे में जब मुख्यमंत्री आए तो मैं पीछे हट गईं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मुझे देखकर कहा कि यहां पर आओ। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने साथ बैठकर मुझे चाय भी पिलाई।
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चाय के बाद उन्होंने पूछा कि बेटा आप क्या करती हो और आपके माता-पिता क्या करते हैं। मैंने बताया कि मैं सड़क के किनारे सब्जी की दुकान करती हूं और माता-पिता की मौत हो चुकी है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से तुम मेरी बेटी हो। आज से मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगा और तुम्हें पक्की दुकान दिलाऊंगा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दुकान में आ रही दिक्कतों और अन्य समस्याओं के बारे में पूछा और इसका हल करने के लिए आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने लघु दुकानदार कल्याण योजना में लचीलापन लाने और 100 करोड़ का वार्षिक बजट में प्रावधान करने का निर्णय लेकर सच में मुझे अपनी बेटी माना है। जिन्हें मेरी दिक्कतों को देखते हुए आम लोगों की दिक्कतों को समझा है।