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हिमाचल प्रदेश: अभी 316 साल मजबूती के साथ खड़ा है भाखड़ा बांध, जानें क्या बोले बीबीएमबी के चीफ इंजीनियर

Sat, 22 Nov 2025 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा सरोज पाठक, बिलासपुर।
सरोज पाठक, बिलासपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 22 Nov 2025 06:00 AM IST
सार

गोबिंद सागर झील में गाद बढ़ने के बावजूद भाखड़ा बांध मजबूती से खड़ा है। अधिक जलस्तर के कारण बांध की डिफ्लेक्शन (झुकाव) में इस वर्ष केवल 0.01 इंच का मामूली परिवर्तन दर्ज किया गया, जो तकनीकी रूप से बिल्कुल सुरक्षित है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Bhakra Dam stands strong for 316 years now know BBMB Chief Engineer said
भाखड़ा बांध - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अभी आने वाले 316 साल के लिए भाखड़ा बांध मजबूती से खड़ा है। गोबिंद सागर झील में गाद बढ़ने के बावजूद यह बांध से करीब 10 किलोमीटर दूर है। इसलिए इससे डैम की संरचना पर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। इस बार प्रदेश में बारिश सामान्य से अधिक हुई, जिसके कारण गोबिंद सागर झील लंबे समय तक भरी रही। इस दौरान पानी का इनफ्लो अधिक और आउटफ्लो कम था। अधिक जलस्तर के कारण बांध की डिफ्लेक्शन (झुकाव) में इस वर्ष केवल 0.01 इंच का मामूली परिवर्तन दर्ज किया गया, जो तकनीकी रूप से बिल्कुल सुरक्षित है।

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जैसे ही पानी का स्तर 1645 फीट पर आएगा, डिफ्लेक्शन अपने आप सामान्य हो जाएगी। फिलहाल सिंचाई के लिए पानी की सप्लाई की मांग कम है। इसलिए जलस्तर धीरे-धीरे सामान्य की ओर बढ़ रहा है। झील से बड़े पैमाने पर गाद निकालने के लिए बीबीएमबी ने राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रक्रिया तेज कर दी है। फाइल तैयार की जा रही है। इसे अगले एक महीने में विधानसभा से मंजूरी दिलाने की तैयारी है। इसके बाद झील के महत्वपूर्ण हिस्सों से गाद हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। बीबीएमबी के चीफ इंजीनियर सीपी सिंह के अनुसार झील में जमा होने वाले पानी का इस समय पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल नहीं हो पा रहा, लेकिन इससे बांध की कार्यप्रणाली या मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ रहा।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि गाद का बांध पर कोई दुष्प्रभाव नहीं है और तकनीकी दृष्टि से बांध बिल्कुल सुरक्षित है। बीबीएमबी ने बताया कि झील में गाद की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है। केंद्र सरकार के साथ मिलकर सेडिमेंट यूटिलाइजेशन (गाद उपयोग) पर नई पॉलिसी तैयार की जा रही है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए बीबीएमबी ने पॉलिसी का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है, जिसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। गोबिंद सागर झील के लुहणू क्षेत्र से गाद निकालने के लिए बीबीएमबी ने एक साल पहले ही पूरा टेंडर तैयार कर लिया है। प्रदेश सरकार की ओर से पॉलिसी न होने के कारण इसे अब तक जारी नहीं किया गया। बीबीएमबी ने हाल ही में टेक्निकल कोऑर्डिनेशन मीटिंग (टीसीएम) भी की है। मीटिंग में राज्य सरकार ने बीबीएमबी को फाइल तैयार कर भेजने को कहा, जिससे इसे मंजूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा सके। 

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आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ कर रहे अध्ययन
आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ भी गाद के स्वरूप, उपयोगिता, सुरक्षित निष्कासन तथा इससे जुड़े जल-प्रबंधन मॉडल पर तकनीकी अध्ययन कर रहे हैं। इनकी रिपोर्ट पॉलिसी के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

गाद निकली तो 12 महीने चलेंगी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां
वर्तमान में गोबिंद सागर झील में गाद अधिक होने के कारण सिर्फ तीन से चार महीने ही वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां संचालित हो पाती हैं। लुहणू क्षेत्र से गाद निकालने पर झील की गहराई और आकार दोनों सुधरेंगे, जिससे वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां पूरे 12 महीने चलाई जा सकेंगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
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