फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Assembly Session Removal of debris from the Beas River Industry Minister Harshwardhan Chauhan

धर्मशाला: ब्यास नदी से मलबा हटाने का काम खनन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं, उद्योग मंत्री ने दी जानकारी

Sat, 29 Nov 2025 01:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, तपोवन (धर्मशाला)।
संवाद न्यूज एजेंसी, तपोवन (धर्मशाला)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 29 Nov 2025 01:00 AM IST
सार

विधायक भुवनेश्वर गौड़ के सवाल का लिखित जवाब देते हुए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि ब्यास नदी से अत्यधिक जमा मलबा हटाने (ड्रेजिंग) का कार्य खनन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
Himachal Assembly Session Removal of debris from the Beas River Industry Minister Harshwardhan Chauhan
तपोवन विधानसभा परिसर/उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि ब्यास नदी से अत्यधिक जमा मलबा हटाने (ड्रेजिंग) का कार्य खनन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यह कार्य आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के प्रावधानों के तहत संबंधित जिला प्राधिकरण द्वारा किया जाता है।

विज्ञापन

विधायक भुवनेश्वर गौड़ के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 24 नवंबर को फैसला लेते हुए अब वन विभाग को वन भूमि पर खनन अनुज्ञापन के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने का अधिकार दे दिया है। इससे भविष्य में अनुमतियों की प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित होगी। 2023 में ब्यास नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कुल्लू जिले में भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया था, जिससे कटाव और भारी नुकसान हुआ। स्थिति को देखते हुए जिला दंडाधिकारी कुल्लू ने 3 नवंबर 2023 को 44 महत्वपूर्ण स्थानों पर ड्रेजिंग की अनुमति प्रदान की। 6 जनवरी 2024 को की गई संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार ब्यास और पार्वती नदियों से कुल 1,63,126 मीट्रिक टन अधिक मलबा निकाला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों पर ओएंडएम शुल्क के 14.28 करोड़ बकाया
कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों पर ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस चार्जेज के 14.28 करोड़ रुपये बकाया हैं। शुल्क की वसूली के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कई मामलों में वसूली न हो पाने का कारण हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से लगाई गई अदालती रोक है। अन्य मामलों में बोर्ड समय-समय पर नोटिस जारी कर उत्पादकों को बकाया राशि जमा करने के लिए बाध्य करता है। यदि बार-बार नोटिस देने के बावजूद भी बकाया शुल्क जमा नहीं करते हैं, तो बिजली बोर्ड उनके ऊर्जा बिलों से राशि समायोजित कर वसूली पर विचार कर सकता है। 
विज्ञापन

निशुल्क किताबों के मुद्रण पर तीन साल में व्यय हुए 1.54 अरब
हिमाचल प्रदेश में बीते तीन वर्ष के दौरान विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली निशुल्क किताबों के मुद्रण पर 1.54 अरब रुपये व्यय हुए हैं। विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि 98.67 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला को कर दिया गया है। 55.73 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान होना शेष है। 

आयुष विभाग में फार्मासिस्टों के 1234 पद स्वीकृत, 100 पद खाली
आयुष विभाग में फार्मासिस्टों के 1234 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रदेश सरकार इन पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने के लिए प्रयासरत है। आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा ने यह जानकारी भाजपा विधायक जनक राज की ओर से पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। 

मशीनरियों और उपकरणों की खरीद के लिए ई टेंडर आमंत्रित
प्रदेश सरकार के गठन के उपरांत विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के लिए उपकरण, नई मशीनियों की खरीद-फरोख्त की गई है। मशीनरियों और उपकरणों की खरीद के लिए ई टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इन मशीनरियों को विभिन्न कंपनियों से खरीदा गया है। ये मशीनरियां कार्यशील है। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने यह जानकारी विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर की ओर से पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। 

केंद्र सरकार से मिली आर्थिक सहायता पर श्वेत पत्र जारी करे भाजपा : राठौर
कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के दो माह बाद भी प्रदेश को 1500 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं। राठौर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण प्रदेश को 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार से धनराशि नहीं मिलने से राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राठौर ने कहा कि भाजपा विधायक प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से करोड़ों रुपये की मदद मिलने के दावे करते हैं। जबकि वास्तविकता में केंद्र सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। अगर भाजपा नेता मानते हैं कि केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मिली है तो उन्हें श्वेत पत्र लाना चाहिए। विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा जल्द पूरी होनी चाहिए।

जवाब में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हिमाचल के बाढ़ एवं वर्षा प्रभावित लोगों के लिए 1500 कराेड़ रुपये की वित्तीय सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की थी। यह राशि प्रदेश सरकार को अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि गत तीन वर्षों में 31 अक्तूबर तक 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्र से आपदा जोखिम प्रबंधन निधि के तहत प्रतिक्रिया एवं राहत, पुनर्निमाण एवं पुनर्प्राप्ति, शमन तथा क्षमता निर्माण गतिविधियों के लिए 3451 करोड़ और प्रदेश सरकार से 769 करोड़ रुपये जारी किए गए। केंद्र सरकार तथा प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न राहत कार्यों के लिए निर्धाारित धनराशि 3686.10 करोड़ रुपये में गत तीन वर्ष में राज्य आपदा मोचन निधि, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि तथा विशेष राहत पैकेज के तहत 3345 करोड़ रुपये व्यय किए तथा 341 करोड़ रुपये शेष हैं।

दस कृषि उपज मंडी समितियों ने इकट्ठा किया 78.95 करोड़ : चंद्र
ठियोग के कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कृषि उपज मंडियों की स्थिति पर जानकारी मांगी। इस पर उन्हें कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने सदन के पटल पर लिखित जवाब दिया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 31 अक्तूबर तक राज्य की 10 कृषि उपज मंडी समितियों ने कुल 78.95 करोड़ रुपये मंडी शुल्क के रूप में एकत्रित किए। यह शुल्क हिमाचल प्रदेश कृषि एवं औद्यानिकी उपज विपणन अधिनियम 2005 की धारा 44 के अनुसार संबंधित मंडी समितियों की ओर से वसूला जाता है। वर्तमान में मंडी शुल्क की दर व्यापार मूल्य का एक प्रतिशत है।

कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि अधिनियम की धारा 49 (3) के तहत वसूले गए मंडी शुल्क का 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य कृषि विपणन बोर्ड को दिया जाता है, जिसका उपयोग बोर्ड के प्रशासनिक और विकास कार्यों में होता है। शेष राशि से मंडियों के निर्माण, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, प्रशासनिक खर्च सहित अन्य पूंजीगत व राजस्व व्यय किए जाते हैं। लंबित भुगतानों की शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। दोषी आढ़तियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए विपणन बोर्ड ने आढ़तियों से पंजीकरण के समय प्रतिभूति राशि जमा करवाने का प्रावधान लागू कर दिया है। कारोबार के आकार के अनुसार प्रतिभूति राशि 5 लाख से 50 लाख रुपये तक तय की गई है। 1 से 15 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले आढ़तियों के लिए 5 लाख रुपये और 75 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वालों के लिए 50 लाख रुपये प्रतिभूति जरूरी है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed