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सूबे के निजी बस ऑपरेटर कल हमीरपुर में बनाएंगे संघर्ष की रणनीति
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हमीरपुर। सूबे के निजी बस ऑपरेटरों की बैठक 18 अगस्त को हमीरपुर के मट्टनसिद्ध में होगी। इसमें निजी बस आपरेटरों के हित में कोई कार्य न करने पर सरकार के खिलाफ रणनीति तय की जाएगी। यह भी तय किया जाएगा कि सरकार से किस तरह से अपनी मांगें मनवाई जा सकें। बैठक की तैयारी में मेजबान के रूप में जुटे हमीरपुर के निजी बस ऑपरेटर विजय ठाकुर, राजकुमार, वीरेंद्र ठाकुर, बलवीर सिंह और राजू रांगड़ा ने बताया कि प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष राजेश पराशर और प्रदेश महासचिव रमेश कमल बैठक में मुख्य रूप से शिरकत करेंगे। हर जिले से आधा दर्जन के करीब निजी बस ऑपरेटर भाग लेंगे। बस ऑपरेटरों को उम्मीद थी कि पूर्व सरकार की ओर से बनाई गई गलत नीतियों के कारण जिस तरह से बस ऑपरेटर प्रताड़ित हो रहे हैं, वर्तमान सरकार उसे बदले।
वर्तमान सरकार भी निजी बस ऑपरेटरों के हित में कोई कार्य नहीं कर रही है। उल्टा हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए निगम की लो फ्लोर बसों को गैरकानूनी तरीके से इंटरस्टेट रूट परमिट पर चलाया जा रहा है। जिससे निजी बस ऑपरेटरों को बहुत नुकसान हो रहा है। ऑपरेटरों की ओर से लिखित रूप से बार-बार सरकार और विभाग से आग्रह करने के बावजूद इस पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। निजी बस आपरेटरों को नॉन स्टॉप बसें, रूट परमिट का ट्रांसफर न होना, डिफाल्टर होने के कारण रूट परमिट का नवीनीकरण न होना, टाइम टेबल नवीनीकरण न करना तथा पासिंग परमिशन न देना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से एचआरटीसी और निजी बस ऑपरेटरों के लिए दोहरी नीति अपनाई जा रही है, जोकि तर्कसंगत नहीं है। इसी को लेकर 18 अगस्त को बैठक रखी गई है। जिसमें मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रणनीति तय की जाएगी।
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वर्तमान सरकार भी निजी बस ऑपरेटरों के हित में कोई कार्य नहीं कर रही है। उल्टा हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए निगम की लो फ्लोर बसों को गैरकानूनी तरीके से इंटरस्टेट रूट परमिट पर चलाया जा रहा है। जिससे निजी बस ऑपरेटरों को बहुत नुकसान हो रहा है। ऑपरेटरों की ओर से लिखित रूप से बार-बार सरकार और विभाग से आग्रह करने के बावजूद इस पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। निजी बस आपरेटरों को नॉन स्टॉप बसें, रूट परमिट का ट्रांसफर न होना, डिफाल्टर होने के कारण रूट परमिट का नवीनीकरण न होना, टाइम टेबल नवीनीकरण न करना तथा पासिंग परमिशन न देना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से एचआरटीसी और निजी बस ऑपरेटरों के लिए दोहरी नीति अपनाई जा रही है, जोकि तर्कसंगत नहीं है। इसी को लेकर 18 अगस्त को बैठक रखी गई है। जिसमें मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रणनीति तय की जाएगी।
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