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Hamirpur (Himachal) News: अंतरिम मुआवजे की राशि 20 से 10 फीसदी करने का आदेश
Thu, 23 Apr 2026 12:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:06 AM IST
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हमीरपुर। सत्र न्यायाधीश हमीरपुर भुवनेश अवस्थी की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक आपराधिक पुनरीक्षण मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा आरोपी पर लगाए गए 20 फीसदी अंतरिम मुआवजे को कम करते हुए उसे 10 फीसदी किया है।
यह मामला शिकायतकर्ता निवासी लंबलू और आरोपी निवासी मोहाली के बीच सात लाख के चेक बाउंस से संबंधित है। निचली अदालत ने मार्च 2022 में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 143 ए के तहत आरोपी को चेक राशि का 20 फीसदी अंतरिम मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया था।
आरोपी विशाल मोहन झांब ने इस आदेश को सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने माना कि अंतरिम मुआवजा देना कोर्ट का विवेकाधिकार है लेकिन अधिकतम 20 फीसदी मुआवजा देने के लिए ठोस कारणों का होना आवश्यक है, जो निचली अदालत के आदेश में स्पष्ट नहीं थे।
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हालांकि आरोपी ने चेक चोरी होने की बात कही थी लेकिन कोर्ट ने पाया कि इसके समर्थन में कोई भी पुख्ता दस्तावेज़ या पुलिस शिकायत रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई थी। अदालत ने पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मुआवजा राशि को 10 फीसदी कर दिया। आरोपी को यह राशि 60 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।
दोनों पक्षों को अब 16 मई 2026 को निचली अदालत में पेश होने का आदेश मिला है। 17 अप्रैल को यह फैसला सुनाया गया है।
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यह मामला शिकायतकर्ता निवासी लंबलू और आरोपी निवासी मोहाली के बीच सात लाख के चेक बाउंस से संबंधित है। निचली अदालत ने मार्च 2022 में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 143 ए के तहत आरोपी को चेक राशि का 20 फीसदी अंतरिम मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया था।
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आरोपी विशाल मोहन झांब ने इस आदेश को सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने माना कि अंतरिम मुआवजा देना कोर्ट का विवेकाधिकार है लेकिन अधिकतम 20 फीसदी मुआवजा देने के लिए ठोस कारणों का होना आवश्यक है, जो निचली अदालत के आदेश में स्पष्ट नहीं थे।
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हालांकि आरोपी ने चेक चोरी होने की बात कही थी लेकिन कोर्ट ने पाया कि इसके समर्थन में कोई भी पुख्ता दस्तावेज़ या पुलिस शिकायत रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई थी। अदालत ने पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मुआवजा राशि को 10 फीसदी कर दिया। आरोपी को यह राशि 60 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।
दोनों पक्षों को अब 16 मई 2026 को निचली अदालत में पेश होने का आदेश मिला है। 17 अप्रैल को यह फैसला सुनाया गया है।