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Hamirpur (Himachal) News: अब बार-बार सेनेटरी पैड खरीदने की टेंशन होगी दूर
Sun, 19 Oct 2025 01:32 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 19 Oct 2025 01:32 AM IST
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कॉटन से तैयार किया गया सेनेटरी पैड। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। महावारी के दौरान महिलाओं को बार-बार सेनेटरी पैड खरीदने के झंझट से नहीं जूझना पड़ेगा। महिलाओं की परेशानी को देखते हुए सेर बलौणी की नेहा देवी ने महिलाओं की इस टेंशन को दूर करते हुए वॉशएबल सेनेटरी पैड तैयार किया है।
कॉटन से तैयार किए गए इस पैड की विशेषता यह है कि इस पैड को धोकर बार-बार प्रयोग में लाया जा सकता है। ऐसे में महिलाओं को हर बार सैनेटरी पैड खरीदने के लिए बाजार का रुख नहीं करना पड़ेगा। इस पैड को लगभग दो साल तक प्रयोग में लाया जा सकता है। बार-बार प्रयोग के बाद भी इससे किसी प्रकार के इंफेक्शन का खतरा नहीं है।
एक सेनेटरी पैड 100 से 150 रुपये में उपलब्ध होगा। महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता में यह तकनीक बेहद असरदार साबित होगी। नेहा देवी ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व निजी कंपनी की ओर से गांव में आयोजित कार्यशाला में पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया गया।
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इसके बाद उन्होंने घर पर पैड बनाने का कार्य शुरू किया। ट्रायल के तौर पर पैड के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए। लैब से अप्रूवल होने के बाद पैड्स को गांव में महिलाओं को बांटा गया। इसके बाद महिलाओं ने इसकी खूब सराहना की और पैड की डिमांड बढ़ गई। डिमांड के बाद अब प्रत्येक माह पैड बनाने के ऑर्डर आ रहे हैं।
अब गांव की दो महिलाओं मनीषा और चंपा देवी को भी सकायत के लिए कार्य पर रखा है। अब पैड से प्रत्येक माह 10 से 20 हजार रुपये की आय हो रही है। इससे एक साथ तीन परिवारों का पालन-पोषण करने में सहायता मिली है।
एक पैकेट में दो पैड होंगे, जो 200 से 300 रुपये में मिलेंगे। महिलाएं इस पैड को ठंडे पानी से धोकर दो साल तक प्रयोग कर सकती हैं। सामान्य सेनेटरी पैड में प्लास्टिक और सिंथेटिक का प्रयोग होता है। सेनेटरी पैड प्रयोग के बाद फेंक दिया जाता है, तो उसे नष्ट होने में 50 से 60 साल तक लग जाते हैं। वहीं, ऐसे सेनेटरी पैड को जलाने से हानिकारक धुआं निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण होता है।
ऐसे तैयार किया है पैड
चार परतों से तैयार इस सेनेटरी पैड को बनाने में पॉलिस्टर पिलिंग, कॉटन पॉलियूरेथेन लेमिनेट का प्रयोग किया गया है। इस फाइबर के ऊपर पॉलिस्टर पिलिंग (एक प्रकार का कपड़ा) का प्रयोग किया गया है, जो गीलेपन को सोखता है। इसके बाद लीकेज रोकने के लिए कॉटन पॉलियूरेथेन लेमिनट (अस्पताल में प्रयोग होने वाला एक कैमिकल) का प्रयोग किया गया। सेनेटरी पैड को इससे कवर किया गया है।
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हमीरपुर। महावारी के दौरान महिलाओं को बार-बार सेनेटरी पैड खरीदने के झंझट से नहीं जूझना पड़ेगा। महिलाओं की परेशानी को देखते हुए सेर बलौणी की नेहा देवी ने महिलाओं की इस टेंशन को दूर करते हुए वॉशएबल सेनेटरी पैड तैयार किया है।
कॉटन से तैयार किए गए इस पैड की विशेषता यह है कि इस पैड को धोकर बार-बार प्रयोग में लाया जा सकता है। ऐसे में महिलाओं को हर बार सैनेटरी पैड खरीदने के लिए बाजार का रुख नहीं करना पड़ेगा। इस पैड को लगभग दो साल तक प्रयोग में लाया जा सकता है। बार-बार प्रयोग के बाद भी इससे किसी प्रकार के इंफेक्शन का खतरा नहीं है।
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एक सेनेटरी पैड 100 से 150 रुपये में उपलब्ध होगा। महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता में यह तकनीक बेहद असरदार साबित होगी। नेहा देवी ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व निजी कंपनी की ओर से गांव में आयोजित कार्यशाला में पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया गया।
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इसके बाद उन्होंने घर पर पैड बनाने का कार्य शुरू किया। ट्रायल के तौर पर पैड के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए। लैब से अप्रूवल होने के बाद पैड्स को गांव में महिलाओं को बांटा गया। इसके बाद महिलाओं ने इसकी खूब सराहना की और पैड की डिमांड बढ़ गई। डिमांड के बाद अब प्रत्येक माह पैड बनाने के ऑर्डर आ रहे हैं।
अब गांव की दो महिलाओं मनीषा और चंपा देवी को भी सकायत के लिए कार्य पर रखा है। अब पैड से प्रत्येक माह 10 से 20 हजार रुपये की आय हो रही है। इससे एक साथ तीन परिवारों का पालन-पोषण करने में सहायता मिली है।
एक पैकेट में दो पैड होंगे, जो 200 से 300 रुपये में मिलेंगे। महिलाएं इस पैड को ठंडे पानी से धोकर दो साल तक प्रयोग कर सकती हैं। सामान्य सेनेटरी पैड में प्लास्टिक और सिंथेटिक का प्रयोग होता है। सेनेटरी पैड प्रयोग के बाद फेंक दिया जाता है, तो उसे नष्ट होने में 50 से 60 साल तक लग जाते हैं। वहीं, ऐसे सेनेटरी पैड को जलाने से हानिकारक धुआं निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण होता है।
ऐसे तैयार किया है पैड
चार परतों से तैयार इस सेनेटरी पैड को बनाने में पॉलिस्टर पिलिंग, कॉटन पॉलियूरेथेन लेमिनेट का प्रयोग किया गया है। इस फाइबर के ऊपर पॉलिस्टर पिलिंग (एक प्रकार का कपड़ा) का प्रयोग किया गया है, जो गीलेपन को सोखता है। इसके बाद लीकेज रोकने के लिए कॉटन पॉलियूरेथेन लेमिनट (अस्पताल में प्रयोग होने वाला एक कैमिकल) का प्रयोग किया गया। सेनेटरी पैड को इससे कवर किया गया है।

कॉटन से तैयार किया गया सेनेटरी पैड। संवाद