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हादसे में टांग गंवाई, बंटी स्वरोजगार से कमा रहा 15 हजार रुपये
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स्कूटी पर आचार व चटनी बेचता बंटी कुमार।
- फोटो : Hamirpur-HP
बड़सर (हमीरपुर)। उपमंडल बड़सर के अंतर्गत बिझड़ी के बंटी कुमार ने हादसे में टांग गंवाने के बावजूद घर पर बैठने की बजाय स्वरोजगार अपनाकर युवाओं के लिए मिसाल पेश की। बंटी ने दुर्घटना में एक टांग खो दी। हादसे ने टांग तो छीनी पर हौसला नहीं।
बंटी बिझड़ी में एक किराये के मकान में रहते हैं। टांग खोने के बाद उनके जीवन में निराशा आ गई। उन्होंने निराशा को दूर करने के लिए सात साल पहले आचार और चटनियों को बेचने का काम शुरू किया। वह पहले गांव-गांव एक टांग के सहारे सामान बेचने लगे। चार साल की मेहनत के बाद उन्होंने एक स्कूटी खरीदी। स्कूटी को इस तरह से मोडिफाई करवाया ताकि दिव्यांग होने के बाद वे उसे न केवल चला सकें बल्कि उसमें आचार और चटनी में ले जा सकें।
उन्होंने बताया कि वह सात वर्षों से रोज सुबह छह बजे किराये के कमरे से आचार बेचने निकल जाते हैं और शाम को सात बजे घर लौटते हैं। बंटी ने बताया की वह बिलासपुर के कुछ इलाकों के साथ पूरे हमीरपुर जिले में स्कूटी पर आचार बेचते हैं। इससे वह प्रतिमाह 15 हजार रुपये कमाते हैं। दिव्यांग होने के बावजूद मेहनत कर कमाने वाला बंटी क्षेत्र के युवाओं के लिए मिसाल बने हैं।
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बंटी बिझड़ी में एक किराये के मकान में रहते हैं। टांग खोने के बाद उनके जीवन में निराशा आ गई। उन्होंने निराशा को दूर करने के लिए सात साल पहले आचार और चटनियों को बेचने का काम शुरू किया। वह पहले गांव-गांव एक टांग के सहारे सामान बेचने लगे। चार साल की मेहनत के बाद उन्होंने एक स्कूटी खरीदी। स्कूटी को इस तरह से मोडिफाई करवाया ताकि दिव्यांग होने के बाद वे उसे न केवल चला सकें बल्कि उसमें आचार और चटनी में ले जा सकें।
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उन्होंने बताया कि वह सात वर्षों से रोज सुबह छह बजे किराये के कमरे से आचार बेचने निकल जाते हैं और शाम को सात बजे घर लौटते हैं। बंटी ने बताया की वह बिलासपुर के कुछ इलाकों के साथ पूरे हमीरपुर जिले में स्कूटी पर आचार बेचते हैं। इससे वह प्रतिमाह 15 हजार रुपये कमाते हैं। दिव्यांग होने के बावजूद मेहनत कर कमाने वाला बंटी क्षेत्र के युवाओं के लिए मिसाल बने हैं।
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