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पूर्व सैनिकों को सिविल सेवा में दी जा रही वरिष्ठता का विरोध
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हमीरपुर। प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्रवक्ता संघ ने पूर्व सैनिकों को सिविल सेवा में दी जाने वाली असांविधानिक वरिष्ठता पर गहरा रोष व्यक्त किया है। संघ की कोर कमेटी के अध्यक्ष केवल ठाकुर, प्रदेश महामंत्री यशवीर जंवाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष महेंद्र गुप्ता एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी विकास धीमान ने कहा कि वरिष्ठता की इस जंग को प्रदेश के विभिन्न कर्मचारियों ने पिछले 25 वर्षों में ट्रिब्यूनल से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ा है। प्रदेश उच्च न्यायालय के 2008 एवं सर्वोच्च न्यायालय के 25 अगस्त 2017 में दिए गए निर्णय के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के पश्चात जो सिविल सेवा में वरिष्ठता एवं वित्तीय लाभ दिए जाते थे, उन्हें असांविधानिक करार दिया गया था।
क्योंकि यह लाभ उस तिथि से दिए जाते थे, जब यह पूर्व सैनिक उक्त पद के लिए योग्यता ही नहीं रखते थे। लेकिन, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग इन पूर्व सैनिकों को वरिष्ठता दे रहा है और इन पूर्व सैनिकों को शिक्षा उपनिदेशक से लेकर प्रधानाचार्य के पद पर लगातार पदोन्नत किया जा रहा है। इस मौके पर संघ के जिला प्रधानों और अन्य सदस्यों ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे असमंजस की स्थिति में है कि यदि प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को नहीं मानती तो वे न्याय के लिए कहां जाएं? अत: उनके पास इस स्थिति में संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। इसके लिए वे शीघ्र ही अन्य अध्यापक संगठनों से विचार-विमर्श के बाद अगली रणनीति तय करेंगे।
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क्योंकि यह लाभ उस तिथि से दिए जाते थे, जब यह पूर्व सैनिक उक्त पद के लिए योग्यता ही नहीं रखते थे। लेकिन, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग इन पूर्व सैनिकों को वरिष्ठता दे रहा है और इन पूर्व सैनिकों को शिक्षा उपनिदेशक से लेकर प्रधानाचार्य के पद पर लगातार पदोन्नत किया जा रहा है। इस मौके पर संघ के जिला प्रधानों और अन्य सदस्यों ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे असमंजस की स्थिति में है कि यदि प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को नहीं मानती तो वे न्याय के लिए कहां जाएं? अत: उनके पास इस स्थिति में संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। इसके लिए वे शीघ्र ही अन्य अध्यापक संगठनों से विचार-विमर्श के बाद अगली रणनीति तय करेंगे।
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