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निजी मेडिकल स्टोर से ली गर्भपात की दवाई बनी जानलेवा, मेडिकल कॉलेज में बची जान
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। गर्भपात की दवाई खाने से एक महिला की जान पर बन आई। निजी मेडिकल स्टोर से बिना चिकित्सकों के परामर्श से खाई यह दवाई महिला को मौत के मुंह तक ले गई। हालत नाजुक होने पर महिला को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर लाया गया। कॉलेज में स्त्री रोग, शल्य और एनेस्थिसिया विभाग के चिकित्सकों और अन्य स्टाफ ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई।
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पहुंची यह महिला दो बच्चों की मां है। अनचाहे गर्भ के चलते उसने बिना किसी सलाह से एक निजी मेडिकल स्टोर से दवाई खा ली। इसके बाद महिला तबियत बिगड़ गई और रक्त का स्राव बंद नहीं हुआ। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर अधिक खून बहने और तनाव के चलते महिला की दिल की धड़कन बंद हो गई थी।
चिकित्सकों ने महिला को सीपीआर देकर तत्काल ऑपरेशन थियेटर में शिफ्ट किया। डॉ. अनुराग और डॉ. मोनिका की टीम ने महिला का सफल ऑपरेशन कर बच्चेदानी निकालकर उसे जीवनदान प्रदान किया।
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मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के शल्य चिकित्सा विभाग की एचओडी डॉ. लक्ष्मी अग्रिहोत्री ने कहा कि महिला की हालत बेहद गंभीर थी। अगर समय पर उपचार व ऑपरेशन नहीं होता तो महिला का बच पाना मुश्किल था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर इस तरह की कोई बात हो तो बिना चिकित्सकों की सलाह के कोई भी दवाई न खाएं। अस्पतालों में अनचाहे गर्भ के लिए उचित उपचार है। चिकित्सकों से परामर्श व उपचार लें।
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हमीरपुर। गर्भपात की दवाई खाने से एक महिला की जान पर बन आई। निजी मेडिकल स्टोर से बिना चिकित्सकों के परामर्श से खाई यह दवाई महिला को मौत के मुंह तक ले गई। हालत नाजुक होने पर महिला को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर लाया गया। कॉलेज में स्त्री रोग, शल्य और एनेस्थिसिया विभाग के चिकित्सकों और अन्य स्टाफ ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई।
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पहुंची यह महिला दो बच्चों की मां है। अनचाहे गर्भ के चलते उसने बिना किसी सलाह से एक निजी मेडिकल स्टोर से दवाई खा ली। इसके बाद महिला तबियत बिगड़ गई और रक्त का स्राव बंद नहीं हुआ। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर अधिक खून बहने और तनाव के चलते महिला की दिल की धड़कन बंद हो गई थी।
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चिकित्सकों ने महिला को सीपीआर देकर तत्काल ऑपरेशन थियेटर में शिफ्ट किया। डॉ. अनुराग और डॉ. मोनिका की टीम ने महिला का सफल ऑपरेशन कर बच्चेदानी निकालकर उसे जीवनदान प्रदान किया।
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मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के शल्य चिकित्सा विभाग की एचओडी डॉ. लक्ष्मी अग्रिहोत्री ने कहा कि महिला की हालत बेहद गंभीर थी। अगर समय पर उपचार व ऑपरेशन नहीं होता तो महिला का बच पाना मुश्किल था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर इस तरह की कोई बात हो तो बिना चिकित्सकों की सलाह के कोई भी दवाई न खाएं। अस्पतालों में अनचाहे गर्भ के लिए उचित उपचार है। चिकित्सकों से परामर्श व उपचार लें।