{"_id":"60cb5be68ebc3e32a71666df","slug":"heart-patients-wandering-for-night-time-test-hamirpur-hp-news-sml373897573","type":"story","status":"publish","title_hn":"रात के समय टेस्ट के लिए भटक रहे दिल के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रात के समय टेस्ट के लिए भटक रहे दिल के मरीज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। जिले के सबसे बड़े अस्पताल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में महज एक ईसीजी तकनीशियन होने के कारण यहां रात को ईसीजी करवाने के लिए मरीजों और तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है। रात के समय आपातकालीन में अगर कोई मरीज ईसीजी के लिए आता है तो उसे यहां ईसीजी तकनीशियन नहीं मिलता है।
लोग बाहरी निजी लैबों में रात को भटकने को मजबूर होते हैं। लेकिन, कई बार निजी लैब वाले भी महज 100 रुपये की जांच के लिए आधी रात को उठने से मना कर देते हैं। कॉलेज प्रबंधन चतुर्थ वर्ग कर्मचारी को ईसीजी टेस्ट सीखाकर उससे यह सेवाएं लेता है, लेकिन मरीजों व तीमारदारों को कहां पता है कि चतुर्थ वर्ग कर्मचारी उनका ईसीजी कर रहा है। इससे मरीज की जान को भी खतरा बन सकता है। बिना विशेषज्ञ के टेस्ट करना मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में इकलौता ईसीजी तकनीशियन भी यहां 22 सालों से रोगी कल्याण समिति के सौजन्य से सेवाएं दे रहा है। यह कर्मचारी भी अस्पताल में स्थायी कर्मचारी नहीं है। 22 सालों से एक ही संस्थान में सेवाएं देने के बावजूद न तो यह स्थायी कर्मचारी हुआ और न ही इसके वेतन में बढ़ोतरी हुई।
विज्ञापन
दिन के समय यह कर्मचारी अपनी ड्यूटी समाप्त कर शाम को घर चला जाता है। अगर रात को कोई दिल का रोगी अस्पताल आता है तो उसे ईसीजी करवाने में परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं, लोगों व जन प्रतिनिधियों संजीव कुमार, विवेक राणा, केएस चौहान ने अस्पताल प्रबंधन व सरकार से यहां ईसीजी तकनीशियन की संख्या बढ़ाने पर 24 घंटे विशेषज्ञ से टेस्ट करवाने की सुविधा देने की मांग की है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की प्राचार्य डॉ. सुमन यादव ने कहा कि वह महत्वपूर्ण बैठक में हैं। इस बारे में कुछ नहीं कह सकती हैं।
विज्ञापन
लोग बाहरी निजी लैबों में रात को भटकने को मजबूर होते हैं। लेकिन, कई बार निजी लैब वाले भी महज 100 रुपये की जांच के लिए आधी रात को उठने से मना कर देते हैं। कॉलेज प्रबंधन चतुर्थ वर्ग कर्मचारी को ईसीजी टेस्ट सीखाकर उससे यह सेवाएं लेता है, लेकिन मरीजों व तीमारदारों को कहां पता है कि चतुर्थ वर्ग कर्मचारी उनका ईसीजी कर रहा है। इससे मरीज की जान को भी खतरा बन सकता है। बिना विशेषज्ञ के टेस्ट करना मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है।
विज्ञापन
वहीं, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में इकलौता ईसीजी तकनीशियन भी यहां 22 सालों से रोगी कल्याण समिति के सौजन्य से सेवाएं दे रहा है। यह कर्मचारी भी अस्पताल में स्थायी कर्मचारी नहीं है। 22 सालों से एक ही संस्थान में सेवाएं देने के बावजूद न तो यह स्थायी कर्मचारी हुआ और न ही इसके वेतन में बढ़ोतरी हुई।
विज्ञापन
दिन के समय यह कर्मचारी अपनी ड्यूटी समाप्त कर शाम को घर चला जाता है। अगर रात को कोई दिल का रोगी अस्पताल आता है तो उसे ईसीजी करवाने में परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं, लोगों व जन प्रतिनिधियों संजीव कुमार, विवेक राणा, केएस चौहान ने अस्पताल प्रबंधन व सरकार से यहां ईसीजी तकनीशियन की संख्या बढ़ाने पर 24 घंटे विशेषज्ञ से टेस्ट करवाने की सुविधा देने की मांग की है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की प्राचार्य डॉ. सुमन यादव ने कहा कि वह महत्वपूर्ण बैठक में हैं। इस बारे में कुछ नहीं कह सकती हैं।