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लॉकडाउन के दौरान नजर नहीं आ रही स्वयंसेवी संस्थाएं
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बिझड़ी (हमीरपुर)। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान जनसेवा के बड़े-बड़े दावे करने वाली नेताओं की एनजीओ और स्वयंसेवी संगठन नोवेल कोरोना महामारी के दौरान गायब हैं। चुनाव से पहले जिला भर में मेडिकल कैंप, कुर्सियां, दरियां और कंबल इत्यादि का वितरण करने वाले नेता इस महामारी के दौरान नजर नहीं आ रहे और न ही उनकी संस्थाएं लोगों के बीच दिख रही हैं।
कोरोना महामारी के दौरान जब लोगों को मास्क और सैनिटाइजर की कमी खल रही है और लोग जगह-जगह मेडिकल स्टोरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन, इस आपदा की घड़ी में लोगों को कोई राहत पहुंचाने वाला नजर नहीं आ रहा। उपमंडल सुजानपुर, हमीरपुर, नादौन के अलावा बड़सर में जब पिछले विधानसभा चुनाव हुए तो लोगों ने टिकट की लड़ाई में श्रेष्ठ साबित करने के लिए समाजसेवी संगठनों का गठन किया। लेकिन, वैश्विक आपदा की घड़ी में बड़सर में जनसेवा की चाह पाले ये नेता लोगों को नजर नहीं आ रहे हैं और न ही इनके बनाए संगठन ही नजर आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता यह जानना चाह रही है कि चुनाव के समय समाज सेवा का दम भरने वाले संगठन व उनके नेता अब कहां चले गए? जिनकी सेवा की जरूरत आज क्षेत्र की जनता को है। लोगों में सुरजीत ठाकुर, वीरेंद्र शर्मा, प्रदीप ठाकुर और दिनेश कुमार ने कहा कि अधिकतर संगठन चुनावों के दौरान ही नजर आते हैं। लेकिन, जब आपदा पड़ती है तो ये गुम हो जाते हैं। जिससे इनका राजनीतिक स्वार्थ लोगों के सामने नजर आने लगा है।
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कोरोना महामारी के दौरान जब लोगों को मास्क और सैनिटाइजर की कमी खल रही है और लोग जगह-जगह मेडिकल स्टोरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन, इस आपदा की घड़ी में लोगों को कोई राहत पहुंचाने वाला नजर नहीं आ रहा। उपमंडल सुजानपुर, हमीरपुर, नादौन के अलावा बड़सर में जब पिछले विधानसभा चुनाव हुए तो लोगों ने टिकट की लड़ाई में श्रेष्ठ साबित करने के लिए समाजसेवी संगठनों का गठन किया। लेकिन, वैश्विक आपदा की घड़ी में बड़सर में जनसेवा की चाह पाले ये नेता लोगों को नजर नहीं आ रहे हैं और न ही इनके बनाए संगठन ही नजर आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता यह जानना चाह रही है कि चुनाव के समय समाज सेवा का दम भरने वाले संगठन व उनके नेता अब कहां चले गए? जिनकी सेवा की जरूरत आज क्षेत्र की जनता को है। लोगों में सुरजीत ठाकुर, वीरेंद्र शर्मा, प्रदीप ठाकुर और दिनेश कुमार ने कहा कि अधिकतर संगठन चुनावों के दौरान ही नजर आते हैं। लेकिन, जब आपदा पड़ती है तो ये गुम हो जाते हैं। जिससे इनका राजनीतिक स्वार्थ लोगों के सामने नजर आने लगा है।
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