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लापता गारंटियों की चौथी बरसी पर श्रद्धांजलि सभा करवा माफी मांगे सरकार : राणा
Tue, 01 Sep 2026 11:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:21 AM IST
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सुजानपुर (हमीरपुर)। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि 31 अगस्त, 2022 को कांग्रेस द्वारा हिमाचल की जनता के सामने रखी गई 10 गारंटियों को आज चार साल पूरे हो गए हैं। इन 48 महीनों में अधिकांश गारंटियां धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपनी इन्हीं लापता गारंटियों की चौथी बरसी पर सरकार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर जनता से अपने अधूरे वादों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस ने 18 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को हर माह 1500 रुपये देने, युवाओं को हर साल एक लाख रोजगार देने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, कर्मचारियों-पेंशनरों के बकाया भुगतान, किसानों से दूध खरीदने और गोबर खरीदने सहित बड़े-बड़े वादे कर हर वर्ग को अपनी बातों में लपेटकर सत्ता हथियाई। अब यही गारंटियां सरकार के लिए गले की फांस बन गई हैं।
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उन्होंने कहा कि चार साल बाद भी अगर सरकार इन गारंटियों को पूरा करने के बजाय बहाने बना रही है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या महिलाओं और अन्य सभी वर्गों से किए गए ये वादे केवल चुनाव जीतने का राजनीतिक हथकंडा थे।
उन्होंने सवाल किया कि अगर कांग्रेस को पहले से पता था कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब है और खजाना खाली है, तो चुनाव से पहले इन गारंटियों की घोषणा किस वित्तीय आधार पर की गई थी। क्या गारंटियां देने से पहले उन्हें पूरा करने के लिए धन का इंतजाम किया गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार को अब यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 10 में से कितनी गारंटियां पूरी हुईं, कितनी अधूरी हैं और प्रदेश में कितनी महिलाओं को वास्तव में 1500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं।
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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपनी इन्हीं लापता गारंटियों की चौथी बरसी पर सरकार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर जनता से अपने अधूरे वादों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
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कांग्रेस ने 18 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को हर माह 1500 रुपये देने, युवाओं को हर साल एक लाख रोजगार देने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, कर्मचारियों-पेंशनरों के बकाया भुगतान, किसानों से दूध खरीदने और गोबर खरीदने सहित बड़े-बड़े वादे कर हर वर्ग को अपनी बातों में लपेटकर सत्ता हथियाई। अब यही गारंटियां सरकार के लिए गले की फांस बन गई हैं।
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उन्होंने कहा कि चार साल बाद भी अगर सरकार इन गारंटियों को पूरा करने के बजाय बहाने बना रही है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या महिलाओं और अन्य सभी वर्गों से किए गए ये वादे केवल चुनाव जीतने का राजनीतिक हथकंडा थे।
उन्होंने सवाल किया कि अगर कांग्रेस को पहले से पता था कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब है और खजाना खाली है, तो चुनाव से पहले इन गारंटियों की घोषणा किस वित्तीय आधार पर की गई थी। क्या गारंटियां देने से पहले उन्हें पूरा करने के लिए धन का इंतजाम किया गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार को अब यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 10 में से कितनी गारंटियां पूरी हुईं, कितनी अधूरी हैं और प्रदेश में कितनी महिलाओं को वास्तव में 1500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं।