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Hamirpur (Himachal) News: क्रस्ना लैब में नहीं हो रहे इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट
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सरकारी लैब में भी महज एक बजे तक लिए जाते हैं सैंपल
पिछले 20 दिन से नहीं हो पा रहे हैं टेस्ट, मरीज हो रहे बेहाल
टेस्ट में खून के माध्यम से की जाती है शरीर के संतुलन की जांच
मशीन में खराबी होने के कारण हो रही है दिक्कत, सरकारी दरों पर होते हैं यहां टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में स्थापित क्रस्ना लैब में पिछले 20 दिन से यह टेस्ट नियमित तौर पर नहीं हो पा रहे हैं। इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट एक रक्त परीक्षण है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन है या नहीं, इसका मापन करता है। इलेक्ट्रोलाइट ऐसे मिनरल हैं जो रक्त में घुल जाते हैं और सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड और बाइकार्बोनेट की मात्रा को रक्त में दर्शाता है। सरकारी लैब में टेस्ट न होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है।
सरकारी लैब में महज 12 से एक बजेे तक ही रक्त के सैंंपल लिए जाते हैं। इसके बाद दो बजे सैंपल की रिपोर्ट दी जाती है। ऐेसे में मरीजों को बाहर की लैबों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मरीजों सुरेश, कनिका, विजय, संतोष, रितिका, कमला देवी, लीलावती, दीनानाथ, उत्तम सिंह आदि ने कहा कि उन्हें निजी लैबों में महंगे दामों में टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। इस बारे में क्रस्ना लैब अधिकारी धीरज शर्मा ने कहा कि मशीन खराब होने के कारण परेशानी है। इंजीनियर आ रहा है तथा मरम्मत का कार्य करवाया जाएगा।
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पिछले 20 दिन से नहीं हो पा रहे हैं टेस्ट, मरीज हो रहे बेहाल
टेस्ट में खून के माध्यम से की जाती है शरीर के संतुलन की जांच
मशीन में खराबी होने के कारण हो रही है दिक्कत, सरकारी दरों पर होते हैं यहां टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में स्थापित क्रस्ना लैब में पिछले 20 दिन से यह टेस्ट नियमित तौर पर नहीं हो पा रहे हैं। इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट एक रक्त परीक्षण है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन है या नहीं, इसका मापन करता है। इलेक्ट्रोलाइट ऐसे मिनरल हैं जो रक्त में घुल जाते हैं और सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड और बाइकार्बोनेट की मात्रा को रक्त में दर्शाता है। सरकारी लैब में टेस्ट न होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है।
सरकारी लैब में महज 12 से एक बजेे तक ही रक्त के सैंंपल लिए जाते हैं। इसके बाद दो बजे सैंपल की रिपोर्ट दी जाती है। ऐेसे में मरीजों को बाहर की लैबों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मरीजों सुरेश, कनिका, विजय, संतोष, रितिका, कमला देवी, लीलावती, दीनानाथ, उत्तम सिंह आदि ने कहा कि उन्हें निजी लैबों में महंगे दामों में टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। इस बारे में क्रस्ना लैब अधिकारी धीरज शर्मा ने कहा कि मशीन खराब होने के कारण परेशानी है। इंजीनियर आ रहा है तथा मरम्मत का कार्य करवाया जाएगा।
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