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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Dr. Sharma produce new variety of Harad

डॉ. कमल शर्मा ने तैयार की हरड़ की उन्नत किस्में

Wed, 26 Apr 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर Updated Wed, 26 Apr 2017 11:59 PM IST
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डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय के नेरी हमीरपुर कॉलेज में सेवारत डॉ. कमल शर्मा और उनकी टीम ने पहली बार हरड़ की उन्नत किस्में तैयार करने में सफलता हासिल की है। इन नई किस्म के पौधों को प्यूंद विधि से तैयार करने की तकनीक विकसित की है। इन नई किस्मों के प्यूंदी पौधों में तीन से चार वर्ष में फल आना शुरू हो जाता है, जबकि बीज से उत्पन्न हरड़ के पौधों में फल आने में 10-12 साल लगते हैं। और उनकी गुणवत्ता भी सुनिश्चित नहीं की जा सकती है। उन्नत पौधों में 100-100 ग्राम के फल आते हैं। इनका बाजार मूल्य बहुत अधिक मिलता है। इन किस्मों की खेती बंदर प्रभावित और कोहरा ग्रसित क्षेत्रों के लिए सफल पाई गई है, जिससे किसानों की आमदन में वृद्धि हुई है।

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    डा. शर्मा के इस काम को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से सराहा गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस शोध को किसानों तक पहुंचाने के लिए डॉ. शर्मा को 72.50 लाख रुपये का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया था। इसके तहत हिमाचल के 6 जिलों के 286 किसानों को उन्नत हरड़ की किस्मों के 20,000 से ज्यादा प्यूंदी पौधे मुफ्त वितरित किए गए हैं। हरड़ की इन उत्तम किस्मों के फलों की बाजार में बहुत मांग है, जिससे किसानों को अच्छी आमदन हो रही है।
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आने वाले समय में किसान, डा. शर्मा के इस शोध से बंदर और कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में अच्छी आमदन ले सकेंगे। डा. शर्मा और उनकी टीम के इस शोध को कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय परिसंवादों में सराहा गया है। उन्होंने न केवल हिमाचल के किसानों को इन किस्मों के पौधे मुहैया करवाए हैं, बल्कि राज्य कृषि, बागवानी, वन विभाग और कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, शेर-ए-कश्मीर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू, हरियाणा वन विभाग, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, अरुणाचल और नवसारी कृषि विश्वविद्यालय गुजरात को भी पौधे दिए हैं।
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इसके अतिरिक्त राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को उन्नत किस्म के पौधे तैयार करने की ट्रेनिंग दी है। किसानों को हरड़ की उन्नत खेती करने के लिए आसान भाषा में मुद्रित सामग्री तैयार की है। और समय-समय पर रेडियो और टेलिविजन के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध करवाई है।


मुख्यमंत्री कर चुके हैं सम्मानित

डॉ. कमल शर्मा को स्टेट इनोवेशन अवार्ड से नवाजा जा चुका है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया। डॉ. कमल को यह अवार्ड उनकी ओर से हरड़ पर किए गए उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रदान किया गया। डॉ. शर्मा के इस शोध को स्टेट इनोवेशन काउंसिल ने स्टेट इनोवेशन अवार्ड के लिए कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में उत्कृष्ट पाया। इस अवार्ड के लिए प्रशस्ति पत्र के अतिरिक्त व्यक्तिगत नगद इनाम और विश्वविद्यालय को भी नकद राशि प्रदान की जाती है।

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