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Hamirpur (Himachal) News: अवाहदेवी मेले में शाम को उमड़ी भीड़, बाजार में लौटी रौनक
Mon, 07 Sep 2026 01:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:26 AM IST
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अवाहदेवी में आयोजित मेले में खरीदारी करते लोग। संवाद
अवाहदेवी (हमीरपुर)। भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर रविवार को अवाहदेवी में ऐतिहासिक मेले का आयोजन किया गया। हमीरपुर और मंडी जिलों के संगम स्थल पर स्थित अवाहदेवी माता मंदिर में कुलदेवी के प्रति आस्था के चलते सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया।
श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में रोट चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की और आशीर्वाद लिया। मेले को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास अस्थायी दुकानें सज गई थीं। हालांकि दिन के समय खरीदारों की संख्या कम रहने से दुकानदार ग्राहकों का इंतजार करते नजर आए।
शाम करीब साढ़े तीन बजे के बाद मेले में भीड़ बढ़नी शुरू हुई और करीब 6 बजे तक बाजार में खूब रौनक रही। ग्राहकों की अचानक बढ़ी संख्या से कारोबारियों को भी राहत मिली।
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मेले में रेडीमेड कपड़े, प्लास्टिक के बर्तन, बच्चों के खिलौने और खान-पान की दुकानों पर खूब भीड़ रही। जलेबी, पकौड़े, आलू-चने और चाट सहित अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की।
दुकानदारों में विशाल, काका राम, सुबह चंद, राजेश कुमार, राजेंद्र कुमार और हरीश कुमार आदि ने बताया कि दोपहर बाद तक इक्का-दुक्का ग्राहक ही पहुंच रहे थे, लेकिन शाम को अचानक भीड़ बढ़ने से कारोबार में तेजी आई।
रक्षाबंधन से गुग्गा नवमी तक अवाहदेवी से गुग्गा जाहरवीर की मंडलियां अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण के लिए निकलती हैं। गुग्गा नवमी की शाम मंडलियां वापस मंदिर पहुंचती हैं। इसके अगले दिन दशमी तिथि पर मंदिर परिसर में पारंपरिक मेले का आयोजन किया जाता है।
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श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में रोट चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की और आशीर्वाद लिया। मेले को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास अस्थायी दुकानें सज गई थीं। हालांकि दिन के समय खरीदारों की संख्या कम रहने से दुकानदार ग्राहकों का इंतजार करते नजर आए।
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शाम करीब साढ़े तीन बजे के बाद मेले में भीड़ बढ़नी शुरू हुई और करीब 6 बजे तक बाजार में खूब रौनक रही। ग्राहकों की अचानक बढ़ी संख्या से कारोबारियों को भी राहत मिली।
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मेले में रेडीमेड कपड़े, प्लास्टिक के बर्तन, बच्चों के खिलौने और खान-पान की दुकानों पर खूब भीड़ रही। जलेबी, पकौड़े, आलू-चने और चाट सहित अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की।
दुकानदारों में विशाल, काका राम, सुबह चंद, राजेश कुमार, राजेंद्र कुमार और हरीश कुमार आदि ने बताया कि दोपहर बाद तक इक्का-दुक्का ग्राहक ही पहुंच रहे थे, लेकिन शाम को अचानक भीड़ बढ़ने से कारोबार में तेजी आई।
रक्षाबंधन से गुग्गा नवमी तक अवाहदेवी से गुग्गा जाहरवीर की मंडलियां अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण के लिए निकलती हैं। गुग्गा नवमी की शाम मंडलियां वापस मंदिर पहुंचती हैं। इसके अगले दिन दशमी तिथि पर मंदिर परिसर में पारंपरिक मेले का आयोजन किया जाता है।

अवाहदेवी में आयोजित मेले में खरीदारी करते लोग। संवाद