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Hamirpur (Himachal) News: लोक निर्माण विभाग में कंपोजिट टेंडर प्रणाली के विरोध में उतरे कांट्रेक्टर
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हमीरपुर। लोक निर्माण विभाग में दशकों से इलेक्ट्रिकल विंग के लिए काम कर रहे कांट्रेक्टरों ने कंपोजिट टेंडर प्रणाली (समग्र निविदा) का पुरजोर विरोध किया है और इस प्रणाली के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। हमीरपुर में रविवार को आयोजित प्रदेशस्तरीय बैठक के दौरान प्रदेश इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष ई. डीएस रांटा ने कहा कि अगर सरकार ने कंपोजिट टेंडर के लिए नियमों को नहीं बदला तो प्रदेश के हजारों ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे।
हालांकि, मुख्यमंत्री सुक्खू से भी एसोसिएशन ने गुहार लगाई थी लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। प्रदेश लोक निर्माण विभाग में पंजीकृत प्रदेश के इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टरों ने हमीरपुर में प्रदेशस्तरीय बैठक का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष ई.डीएस रांटा ने की। मीटिंग में नार्थ जोन के उपप्रधान ई.राजीव शर्मा, साउथ जोन उपप्रधान ई.रोहताश वर्मा, सचिव ई. दीपक सूद के अलावा कोषाध्यक्ष राकेश कुमार भी मौजूद रहे। हिमाचल में लोक निर्माण विभाग के तहत पंजीकृत इलेक्ट्रिकल ठेकेदार ए क्लास के 1600, बी क्लास के 1000 और सी क्लास में 2200 ठेकेदार काम कर रहे हैं जो इस निर्णय से पूरी तरह से प्रभावित है और भविष्य की चिंता सता रही है। प्रदेश इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष ई. डीएस रांटा ने कहा कि प्रदेश के हजारों इलेक्ट्रिकल ठेकेदार सिविल में टेंडर नहीं ले पा रहे हैं। अगर इलेक्ट्रिकल ठेकेदार सिविल ठेकेदार के साथ काम करेंगे तो इसमें शोषण होने की आशंका है। रांटा ने कहा कि नई नोटिफिकेशन में इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों को पांच करोड़ से अधिक का काम एक ही ठेकेदार को मिलेगा, जो सिविल के साथ इलेक्ट्रिकल के काम भी करवाएंगे लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था। इस वजह से ए क्लास ठेकेदार सिर्फ 25 लाख रुपये के ही काम कर पाएंगे। पिछले 30 साल से ठेकेदार काम कर रहे हैं लेकिन इस निर्णय से पूरे प्रदेशभर के ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे। उपप्रधान रोहताश वर्मा ने बताया कि 1991 से इलेक्ट्रिकल ठेकेदारी का काम कर रहा हूं और अभी कंपोजिट टेंडरों के लिए निकाली गई नोटिफिकेशन का विरोध जता रहे हैं। पांच करोड़ की लिमिट सिविल ठेकेदारों के लिए लगाई गई और अब पंजीकृत ए क्लास इलेक्ट्रिकल ठेकेदार केवल 25 लाख तक का ही काम कर सकेगा। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पुराने सिस्टम के तहत ही इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों से काम करवाया जाए। कांगड़ा जिले के ठेकेदार जगजीत राय ने बताया कि 1995 से ठेकेदारी का काम कर रहा हूं लेकिन अब नई नोटिफिकेशन के चलते बहुत नुकसान पहुंच रहा हेै। आने वाले समय के लिए चिंता सता रही है क्योंकि अब काम करने की लिमिट 25 लाख कर दी है। उन्होंने मांग की है कि इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों के हित में सरकार जल्द फैसला लें, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
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हालांकि, मुख्यमंत्री सुक्खू से भी एसोसिएशन ने गुहार लगाई थी लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। प्रदेश लोक निर्माण विभाग में पंजीकृत प्रदेश के इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टरों ने हमीरपुर में प्रदेशस्तरीय बैठक का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष ई.डीएस रांटा ने की। मीटिंग में नार्थ जोन के उपप्रधान ई.राजीव शर्मा, साउथ जोन उपप्रधान ई.रोहताश वर्मा, सचिव ई. दीपक सूद के अलावा कोषाध्यक्ष राकेश कुमार भी मौजूद रहे। हिमाचल में लोक निर्माण विभाग के तहत पंजीकृत इलेक्ट्रिकल ठेकेदार ए क्लास के 1600, बी क्लास के 1000 और सी क्लास में 2200 ठेकेदार काम कर रहे हैं जो इस निर्णय से पूरी तरह से प्रभावित है और भविष्य की चिंता सता रही है। प्रदेश इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष ई. डीएस रांटा ने कहा कि प्रदेश के हजारों इलेक्ट्रिकल ठेकेदार सिविल में टेंडर नहीं ले पा रहे हैं। अगर इलेक्ट्रिकल ठेकेदार सिविल ठेकेदार के साथ काम करेंगे तो इसमें शोषण होने की आशंका है। रांटा ने कहा कि नई नोटिफिकेशन में इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों को पांच करोड़ से अधिक का काम एक ही ठेकेदार को मिलेगा, जो सिविल के साथ इलेक्ट्रिकल के काम भी करवाएंगे लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था। इस वजह से ए क्लास ठेकेदार सिर्फ 25 लाख रुपये के ही काम कर पाएंगे। पिछले 30 साल से ठेकेदार काम कर रहे हैं लेकिन इस निर्णय से पूरे प्रदेशभर के ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे। उपप्रधान रोहताश वर्मा ने बताया कि 1991 से इलेक्ट्रिकल ठेकेदारी का काम कर रहा हूं और अभी कंपोजिट टेंडरों के लिए निकाली गई नोटिफिकेशन का विरोध जता रहे हैं। पांच करोड़ की लिमिट सिविल ठेकेदारों के लिए लगाई गई और अब पंजीकृत ए क्लास इलेक्ट्रिकल ठेकेदार केवल 25 लाख तक का ही काम कर सकेगा। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पुराने सिस्टम के तहत ही इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों से काम करवाया जाए। कांगड़ा जिले के ठेकेदार जगजीत राय ने बताया कि 1995 से ठेकेदारी का काम कर रहा हूं लेकिन अब नई नोटिफिकेशन के चलते बहुत नुकसान पहुंच रहा हेै। आने वाले समय के लिए चिंता सता रही है क्योंकि अब काम करने की लिमिट 25 लाख कर दी है। उन्होंने मांग की है कि इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों के हित में सरकार जल्द फैसला लें, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
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