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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   CITU sent a memorandum to the Prime Minister regarding the demands

मांगों को लेकर सीटू ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

Thu, 10 Jun 2021 07:33 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 07:33 PM IST
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हमीरपुर। सीटू इकाई हमीरपुर के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। प्रतिनिधिमंडल में सीटू जिला सचिव जोगिंदर कुमार, सुरेश कुमार और ब्रह्म दास आदि उपस्थित रहे। सचिव जोगिंदर ने कहा कि कोरोना काल में देश की कुल श्रम शक्ति का 25 फीसदी भाग रोजगार से वंचित हुआ है, जिससे भयंकर रूप से बेरोजगारी बढ़ी है और 97 प्रतिशत जनता का वास्तविक वेतन कम हुआ है। इस समय मजदूरों को केंद्र सरकार की ओर से कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिली है।
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इसके विपरीत मजदूरों के लिए पिछले सौ वर्षों में बने श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। जिससे मजदूर सामाजिक सुरक्षा से बिल्कुल वंचित हो जाएंगे। किसानों के खिलाफ बनाए गए तीन कृषि कानून व बिजली विधेयक 2020 से किसानों व आम जनता की सामाजिक सुरक्षा नष्ट हो जाएगी। देश के कई प्रदेशों में काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 कर दिया है। इससे जहां एक तरफ मजदूरों की छंटनी होगी, दूसरी ओर मजदूरों की स्थिति बंधुआ मजदूरों जैसी हो जाएगी। कोरोना महामारी में स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों, हेल्थ वर्करों, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी, सफाई आदि में कार्यरत नियमित और आउटसोर्स व ठेका मजदूरों को कोरोना योद्धाओं की सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इस मसले पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक ने कड़ा संज्ञान लिया है। प्रधानमंत्री इन विषयों पर तुरंत हस्तक्षेप कर मजदूरों को राहत प्रदान करे। सबको 6 महीने के भीतर मुफ्त वैक्सीन सुनिश्चित की जाए।
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अस्पतालों में ऑक्सीजन, बिस्तर, दवाइयों सहित सभी सुविधाओं सहित उचित स्टाफ उपलब्ध करवाया जाए, सभी आयकर मुक्त परिवारों को 7500 रुपये की आर्थिक मदद की जाए। हर व्यक्ति को महामारी के दौर में 10 किलो राशन उपलब्ध करवाया जाए व जनविरोधी और कॉरपोरेट समर्थक भेदभाव पूर्ण नीति पर रोक लगाई जाए। किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों व बिजली विधेयक 2020 को वापस लिया जाए। कोरोना काल में मजदूरों की रोजगार से छंटनी व आवासों से निष्कासन रोका जाए और मजदूरों के वेतन में कटौती बंद की जाए। कारखानों में 12 घंटे के कार्य दिवस का आदेश वापस लिया जाए। कोरोना से जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को तुरंत आपदा राहत कोष से चार लाख की आर्थिक मदद दी जाए। मजदूरों का न्यूनतम वेतन 21000 मासिक किया जाए।
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