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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Chunni Lal showing the path of self-reliance even at the age of 90

90 साल की उम्र में भी आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहे चुन्नी लाल

Sun, 10 Jul 2022 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jul 2022 11:39 PM IST
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Chunni Lal showing the path of self-reliance even at the age of 90
मिट्टी का घड़ा बनाने के बाद उसे अंतिम रूप देता जंदली राजपूतां गांव का चुन्नी लाल। - फोटो : Hamirpur-HP
रंगस (नादौन)। दिल में कुछ करने और आत्मनिर्भर बनने का जज्बा हो तो उम्र मायने नहीं रखती।
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रंगस के जंदली राजपूतां गांव निवासी चुन्नी लाल (90) युवाओं के लिए मार्गदर्शक बने हैं और स्वावलंबी बनने की राह दिखा रहे हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंचने के बावजूद वह अपने परंपरागत व्यवसाय को बढ़ाकर आजीविका कमा रहे हैं। चुन्नी लाल ने युवाओं से आग्रह किया है कि हर किसी को सरकारी नौकरी संभव नहीं है, इसलिए तकनीकी काम सीखकर या अपने परिवार के व्यवसाय को सही दिशा में आगे बढ़ाकर अपनी आजीविका कमा सकते हैं।
चुन्नी लाल क्षेत्र में चुन्नू कुम्हार के नाम से मशहूर हैं और दशकों से मिट्टी के बर्तन बनाकर और बेचकर कमाई कर रहे हैं। सीजन के दौरान वह प्रतिमाह पचास हजार रुपये तक कमा लेते हैं। उनकी पत्नी का निधन हो गया है, जबकि बेटा निजी कंपनी में नौकरी करता है और घर से बाहर रहता है। ऐसे में चुन्नी लाल मिट्टी के बेहतरीन बर्तन बनाकर उन्हें बेचने भी खुद निकलते हैं। जब काम ज्यादा होता है तो अन्य लोगों को भी इन बर्तनों को बेचने व बनाने के लिए रोजगार उपलब्ध करवाते हैं।
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वह अपने पिता की ओर से चलाए गए मिट्टी के बर्तनों के काम को करीब 75 सालों से सहेजे हुए हैं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। चुन्नी लाल ने बताया कि अपने परंपरागत पेशे को उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय दुनीचंद से 15 वर्ष की आयु में सीख लिया था। उसके बाद वर्ष 1947 में पिता की मृत्यु होने के उपरांत उन्होंने ही इस पेशे को आगे बढ़ा कर मिट्टी के बर्तन अपने हाथों से बनाकर क्षेत्रवासियों को सस्ते दाम पर उपलब्ध करवाए। 90 वर्ष की आयु में भी वह गर्मी के मौसम में मिट्टी के बर्तन बनाते हैं और आजीविका कमाते हैं। इससे वह अपनी पोती की डेंटल डॉक्टर की पढ़ाई में भी मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि युवावस्था से ही अपने परंपरागत पेशे को सीख कर आगे बढ़ाया था और आज उसी के माध्यम से अच्छा पैसा कमा कर अपने परिवार की आर्थिक मदद करने में सहायक हो रहा हूं। 2012 में उनकी पत्नी का देहांत हो गया था। उसके बाद अकेले ही घर में रहकर इस पेशे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह लोगों को ऐेसे परंपरागत व्यवसायों और चीजों को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
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