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कर्फ्यू के चलते पशुओं को चारा, पोल्ट्री को फीड की किल्लत
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बड़सर/हमीरपुर। प्रदेशभर में कर्फ्यू के कारण जिले के पशुपालकों को चारे, फीड और पोल्ट्री फार्म संचालकों को फीड की किल्लत हो गई है। पशुओं के लिए तूड़ी व फीड पंजाब और हरियाणा से आती थी, लेकिन कर्फ्यू के चलते बाहरी प्रदेशों से ऐसे वाहनों की आवाजाही बिल्कुल ठप है। महज जरूरी चीजों के वाहन ही प्रदेश व जिले में आ रहे हैं। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं को पालना मुश्किल हो गया है। पशुपालकों विनोद कुमार, संजीव कुमार, दिनेश कुमार, जीवन चंद, रवि कुमार का कहना है कि प्रशासन ने हमें तो तीन घंटे की मोहलत राशन इत्यादि खरीदने को दी है, लेकिन पशुओं के लिए तूड़ी व फीड न आने से पशु भूखे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग अपने खेतों से पशुओं को चारा ला भी रहे हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र सहित ऐसे पशुपालक जो फीड और तूड़ी सहित खरीदे गए घास को ही पशुओं को खिलाने के लिए निर्भर हैं, परेशानी में है। वहीं पोल्ट्री फार्म में मुर्गों को फीड उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कोरोना वायरस के चलते एक तो लोग मुर्गा खाने से परहेज कर रहे हैं और ऐसे में फार्म से मुर्गों की तादाद नहीं घट रही है। ऐसे में फार्म संचालकों को फीड के लिए बिना कमाई से पैसे खर्च करने पड़े। अब तो फीड पहुंच ही नहीं रही है। इस कारण पशुपालकों और पोल्ट्री फार्म संचालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन पशुपालकों और पोल्ट्री फार्म संचालकों ने चारा व फीड उपलब्ध करवाने की मांग प्रशासन व सरकार से की है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग अपने खेतों से पशुओं को चारा ला भी रहे हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र सहित ऐसे पशुपालक जो फीड और तूड़ी सहित खरीदे गए घास को ही पशुओं को खिलाने के लिए निर्भर हैं, परेशानी में है। वहीं पोल्ट्री फार्म में मुर्गों को फीड उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कोरोना वायरस के चलते एक तो लोग मुर्गा खाने से परहेज कर रहे हैं और ऐसे में फार्म से मुर्गों की तादाद नहीं घट रही है। ऐसे में फार्म संचालकों को फीड के लिए बिना कमाई से पैसे खर्च करने पड़े। अब तो फीड पहुंच ही नहीं रही है। इस कारण पशुपालकों और पोल्ट्री फार्म संचालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन पशुपालकों और पोल्ट्री फार्म संचालकों ने चारा व फीड उपलब्ध करवाने की मांग प्रशासन व सरकार से की है।
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