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सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं चलने से आंगनबाड़ी केंद्र प्रभावित
Updated Sun, 17 Jun 2018 10:34 PM IST
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हमीरपुर। सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं चलने से आंगनबाड़ी केंद्र प्रभावित हो रहे हैं। जिला सहित प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं चल रही हैं। सरकारी स्कूलों में घट रही बच्चों की संख्या और प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने के लिए सरकारी स्कूल अपने स्तर पर इन कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। इस कारण अभिभावक ढाई से तीन साल की उम्र में ही बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं और उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजने से परहेज कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करने के लिए कोई अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की है। सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं चलाने के लिए शिक्षा विभाग के पास नर्सरी ट्रेंड टीचर (एनटीटी) भी नहीं है। प्राइमरी स्कूल को पढ़ाने वाले अध्यापक ही बच्चों को नर्सरी कक्षा में भी पढ़ा रहे हैं। इससे बच्चों को भी नुकसान हो रहा है। अगर सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं सरकार शुरू करना चाहती हैं तो इसके लिए सरकार को आंगनबाड़ी केंद्रों का भी ध्यान रखना होगा।
इससे पूर्व चार साल तक के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र जाते थे। जो परिवार प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का सामर्थ्य नहीं रखते हैं वह अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजते हैं, लेकिन अब सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू हो जाने से वह बच्चों को स्कूल में ही भेज रहे हैं। एक तरफ जहां आंगनबाड़ी केंद्रों की तादात कम हो रही है, वहीं बच्चों को केंद्रों में मिलने वाला पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पा रहा है। सीडीपीओ हमीरपुर बलवीर विरला का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू होने के बाद कम हुई है। वहीं शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक देश राज भरवाल का कहना है कि शिक्षा गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के मद्देनजर कई स्कूल नर्सरी की कक्षाएं अपने स्तर पर चला रहे हैं। अभी तक इसकी कोई अधिसूचना नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही इसके लिए योजना बन सकती है। जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर नर्सरी कक्षाएं शुरू करने से प्रभाव न पड़े।
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इससे पूर्व चार साल तक के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र जाते थे। जो परिवार प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का सामर्थ्य नहीं रखते हैं वह अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजते हैं, लेकिन अब सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू हो जाने से वह बच्चों को स्कूल में ही भेज रहे हैं। एक तरफ जहां आंगनबाड़ी केंद्रों की तादात कम हो रही है, वहीं बच्चों को केंद्रों में मिलने वाला पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पा रहा है। सीडीपीओ हमीरपुर बलवीर विरला का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू होने के बाद कम हुई है। वहीं शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक देश राज भरवाल का कहना है कि शिक्षा गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के मद्देनजर कई स्कूल नर्सरी की कक्षाएं अपने स्तर पर चला रहे हैं। अभी तक इसकी कोई अधिसूचना नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही इसके लिए योजना बन सकती है। जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर नर्सरी कक्षाएं शुरू करने से प्रभाव न पड़े।
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