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छात्रों को शोषण से बचाने के लिए टास्क फोर्स का हो गठन : सुशील
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:30 PM IST
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हमीरपुर। दी उपभोक्ता संरक्षण संगठन हमीरपुर ने प्रदेश भर के निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रों के शोषण को रोकने के लिए प्रदेश सरकार से निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित करने का आग्रह किया है। हमीरपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में संगठन के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने कहा कि गत दिनों सोलन में एक छात्र द्वारा की गई आत्महत्या की घटना ने निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रों के शोषण की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थान हर वर्ष छात्रों से लाखों रुपये फीस के रूप में वसूलते हैं लेकिन छात्रों के अभिभावकों को छात्रों की वस्तुस्थिति से अवगत करवाने की जहमत नहीं उठाते।
उन्होंने कहा कि संगठन के पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं कि निजी शिक्षण संस्थान छात्रों की जानबूझ कर अनुपस्थिति दर्शाते हैं तथा एक बार अनुपस्थित होने पर हजारों रुपयों का जुर्माना वसूलते हैं। कई बार बच्चे अपने माता-पिता को सच बताने की बजाय गलत कदम उठा बैठते हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में कार्यरत प्राध्यापक बच्चों के माता-पिता को साल बचाने को लेकर संस्थान के मालिकों से मिलने की बात करते हैं और यहीं से शोषण का खेल शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में मां-बाप इन संस्थानों की ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाते हैं। यही शिक्षण संस्थान छोटी-छोटी बातों को लेकर छात्रों से मोटी फीस जुर्माने के रूप में इकट्ठा करते हैं। निजी शिक्षण संस्थानों के बच्चे कोई गलत कदम न उठाएं इसके लिए सरकार टास्क फोर्स का गठन करें। उस टास्क फोर्स में प्रत्येक जिला के एडीएम स्तर के अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को शामिल किया जाए।
यह टास्क फोर्स प्रत्येक जिला के निजी शिक्षण संस्थानों में बच्चों को निलंबित किए जाने की घटनाओं और उन पर लगाए जाने वाले जुर्मानों की भी जांच करे। संगठन सरकार द्वारा कोई इस तरह का कदम न उठाए जाने पर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी डाल सकता है। इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष पंकज, महासचिव मनोहर लाल कानूनगो, सौरभ सूद, कोषाध्यक्ष युद्धवीर पठानिया, प्रेस सचिव जसवीर तथा सचिव विशाल राणा भी उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि संगठन के पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं कि निजी शिक्षण संस्थान छात्रों की जानबूझ कर अनुपस्थिति दर्शाते हैं तथा एक बार अनुपस्थित होने पर हजारों रुपयों का जुर्माना वसूलते हैं। कई बार बच्चे अपने माता-पिता को सच बताने की बजाय गलत कदम उठा बैठते हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में कार्यरत प्राध्यापक बच्चों के माता-पिता को साल बचाने को लेकर संस्थान के मालिकों से मिलने की बात करते हैं और यहीं से शोषण का खेल शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में मां-बाप इन संस्थानों की ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाते हैं। यही शिक्षण संस्थान छोटी-छोटी बातों को लेकर छात्रों से मोटी फीस जुर्माने के रूप में इकट्ठा करते हैं। निजी शिक्षण संस्थानों के बच्चे कोई गलत कदम न उठाएं इसके लिए सरकार टास्क फोर्स का गठन करें। उस टास्क फोर्स में प्रत्येक जिला के एडीएम स्तर के अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को शामिल किया जाए।
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यह टास्क फोर्स प्रत्येक जिला के निजी शिक्षण संस्थानों में बच्चों को निलंबित किए जाने की घटनाओं और उन पर लगाए जाने वाले जुर्मानों की भी जांच करे। संगठन सरकार द्वारा कोई इस तरह का कदम न उठाए जाने पर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी डाल सकता है। इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष पंकज, महासचिव मनोहर लाल कानूनगो, सौरभ सूद, कोषाध्यक्ष युद्धवीर पठानिया, प्रेस सचिव जसवीर तथा सचिव विशाल राणा भी उपस्थित रहे।
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